अमृतसर में बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) के पद पर तैनात बिक्रमजीत सिंह को सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलना भारी पड़ गया है। सीडीपीओ बिक्रमजीत सिंह ने अमृतसर में उनके अधीन आंगनबाड़ी सेंटरों पर बच्चों और गर्भवती महिलाओं को परोसे जाने वाले खाने की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे। उन्होंने खराब राशन से बनने वाले खाने के सैंपल चेक कर अपने अधीन सभी सेंटरों को लेकर एक रिपोर्ट बनाकर अपने आला अफसरों को भेजी थी।
राशन में फंगस लगे होने के कारण सीडीपीओ बिक्रमजीत सिंह ने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी सप्लाई तत्काल प्रभाव से रोके जाने और संबंधित कंपनी जिसके जरिए यह राशन सेंटरों पर आता था, उसके खिलाफ कार्रवाई करने को लेकर रिपोर्ट दी थी। लेकिन, जैसे ही सीडीपीओ ने खराब राशन की सप्लाई को लेकर शिकायत की, दो घंटे बाद ही उनका सीडीपीओ को उनका सस्पेंशन ऑर्डर थमा दिया गया।
सीडीपीओ बिक्रमजीत सिंह ने अपने बयान में कहा कि जब उन्हें अपने अधीन आंगनबाड़ी सेंटरों में खराब राशन सप्लाई का पता लगा, उन्हें तुरंत कदम उठाया। राशन में फंगस लगा हुआ था, जिसे खाने में परोसे जाने से बच्चों और गर्भवती महिलाओं की मृत्यु तक हो सकती है। वह इसको नजरंदाज किए बिना अपना काम ईमानदारी से कर रहे थे, उन्होंने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को इसके बार सूचित किया, तो विभाग ने ही उन पर कार्रवाई कर दी। सीडीपीओ ने बताया कि विभाग ने उन्हें गलत रिपोर्ट बनाने का हवाला देकर सस्पेंड कर दिया।
सीडीपीओ पर गलत रिपोर्ट बनाने का आरोप
सामाजिक सुरक्षा, महिला और बाल विकास विभाग के विशेष मुख्य सचिव ने अमृतसर सीडीपीओ बिक्रमजीत सिंह को आंगनबाड़ी सेंटरों की चेकिंग के दौरान अपने सहकर्मियों द्वारा बच्चों और गर्भवती महिलाओं को परोसे जाने वाले खाने की गुणवत्ता को लेकर गलत रिपोर्ट देने के लिए उन पर दबाव बनाने का हवाला देते हुए कार्रवाई की है। विशेष मुख्य सचिव ने सीडीपीओ को पंजाब सिविल सर्विसेज 1970 के नियमों के तहत तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करते हुए चंडीगढ़ हेड क्वार्टर में अटैच किया है। सीडीपीओ को अगले आदेश तक हेडक्वार्टर में ही रहने के लिए आदेश जारी किये हैं।