अफसरों को बनाया चाहिए मित्रवत व्यवहार
राजेश शर्मा ने बताया कि ड्यूटी के तनाव से जवानों को निकालने की जिम्मेदारी अफसरों को उठानी चाहिए। माहौल को दोस्ताना बनाकर वह इसकी पहल कर सकते हैं। हालांकि कुछ अफसर ऐसा करते भी हैं। सैनिकों से प्रेरणादायक बातें करनी चाहिए। सिपाही का हवलदार से, हवलदार का एसआई से मित्रवत व्यवहार रहना चाहिए। यही तारतम्य जूनियर अफसरों का अपने वरिष्ठों से होना चाहिए।
वह कहते हैं कि मौजूदा समय में यह व्यवस्था टूट रही है। अफसर अपने जूनियर से सिर्फ ड्यूटी को लेकर ही बात करते हैं। कभी उनकी परेशानी जानने की कोशिश नहीं करते। यदि कोई अफसर अपने जूनियर से हंसकर बात कर लेता है तो उसका आत्मविश्वास बढ़ जाता है। यह अफसरों की जिम्मेदारी है कि वह अपने आसपास ऐसा माहौल न बनने दें कि कोई जूनियर अपनी बात तक उनके सामने कहने से झिझके ।
सैनिक सम्मेलन बहुत जरूरी
परिवार से दूर रहकर देश सेवा में लगे जवानों का तनाव दूर करने के लिए सैनिक सम्मेलन जैसी पहल बहुत जरूरी है। इन दिनों यह महज औपचारिकता बनकर रह गए हैं। अधिकारियों को सिपाहियों व अन्य के अभिभावक के तौर पर काम करते हुए समय-समय पर सैनिक सम्मेलन में बात करनी चाहिए। उनके साथ खेलना चाहिए।