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पंजाब कांग्रेस को नई दिशा देने की कोशिश: हाईकमान ने तेज तर्रार राजा वड़िंग को सौंपी कमान, सिद्धू की लॉबिंग नहीं आई काम

Sun, 10 Apr 2022 10:27 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

नवजोत सिद्धू की तरह ही राजा वड़िंग भी राहुल गांधी की पसंद रहे हैं और दोनों राहुल के करीबियों में गिने जाते हैं। कैप्टन और चन्नी के मुख्यमंत्री काल के दौरान सिद्धू को राहुल गांधी का वरदहस्त प्राप्त रहा, जिसके चलते सिद्धू पार्टी के सीनियर नेताओं को भी अनदेखा करने लगे थे।
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राहुल गांधी के करीबी हैं पंजाब कांग्रेस के नए प्रधान राजा वड़िंग। - फोटो : twitter
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विस्तार
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कांग्रेस हाईकमान ने राजा वड़िंग को पंजाब कांग्रेस की कमान सौंपकर सिद्धू समर्थक धड़े और सिद्धू विरोधी धड़े में बंट चुकी प्रदेश इकाई को नई दिशा में ले जाने की कोशिश की है। विधानसभा चुनाव में हार के करीब एक माह बाद हाईकमान के इस फैसले से नवजोत सिद्धू और उनके समर्थक नेताओं को जोर का झटका लगा है क्योंकि सोनिया गांधी द्वारा प्रधान पद से इस्तीफा लिए जाने के बाद भी सिद्धू इन दिनों फिर प्रधानगी हासिल करने के लिए लॉबिंग कर रहे थे।

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सिद्धू ने हाईकमान की दिल्ली में बैठकों के समानांतर ही पंजाब में अपने समर्थक विधायकों और नेताओं के साथ बैठकें करते हुए शक्ति प्रदर्शन भी किया, लेकिन हाईकमान ने इस बार सिद्धू को तरजीह नहीं दी। गुरुवार को चंडीगढ़ में महंगाई के खिलाफ पंजाब कांग्रेस के धरने के दौरान सिद्धू और बरिंदर ढिल्लों के बीच सार्वजनिक तौर पर सामने आए विवाद ने प्रदेश कांग्रेस की लड़ाई को सड़क पर ला दिया।

पार्टी की हार के लिए सिद्धू जिम्मेदार

विधानसभा चुनाव में हार का प्रमुख कारण अंदरूनी लड़ाई और गुटबाजी को माना गया है। इसके लिए पार्टी के सीनियर नेताओं ने नवजोत सिद्धू की भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए इस बार हाईकमान पर जबरदस्त दबाव बनाया। पूर्व प्रधान और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी समेत सभी सीनियर नेताओं ने नवजोत सिद्धू को हार के लिए जिम्मेदार ठहराया है। एआईसीसी के पंजाब प्रभारी हरीश चौधरी ने भी सिद्धू को हार के लिए जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने कहा था कि चन्नी के खिलाफ सिद्धू के सार्वजनिक बयानों ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया है। इसके चलते हाईकमान ने भी कड़े तेवर अपना लिए और सिद्धू को किसी तरह की जिम्मेदारी न देने का फैसला ले लिया।

सिद्धू की तरह राजा वड़िंग भी हैं राहुल गांधी की पसंद

सिद्धू जितने मुखर नेता माने जाते रहे हैं, राजा वड़िंग भी उतने ही तेजतर्रार हैं। राजा वड़िंग को प्रदेश इकाई की कमान सौंपते हुए हाईकमान ने यह मान लिया है कि वह सिद्धू समर्थकों के बगावती सुरों को दबाने में कामयाब रहेंगे। खास बात यह भी है कि नवजोत सिद्धू की तरह ही राजा वड़िंग भी राहुल गांधी की पसंद रहे हैं और दोनों राहुल के करीबियों में गिने जाते हैं। कैप्टन और चन्नी के मुख्यमंत्री काल के दौरान सिद्धू को राहुल गांधी का वरदहस्त प्राप्त रहा, जिसके चलते सिद्धू पार्टी के सीनियर नेताओं को भी अनदेखा करने लगे थे। इस दौरान राहुल ने सिद्धू के खिलाफ पहुंची शिकायतों को भी नजरअंदाज किया लेकिन विधानसभा चुनाव के दौरान हवा बदल गई। सिद्धू न तो अपनी सीट बचा सके और न ही पार्टी का कोई भला कर सके। राजा वड़िंग को राहुल गांधी ने भारतीय युवा कांग्रेस का नेतृत्व करने के लिए चुना था। माना जा रहा है कि राजा वड़िंग के चयन में राहुल गांधी की अहम भूमिका रही है।
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बगावत के डर से मुश्किल हो गया था प्रधान का चयन

सिद्धू अपने समर्थकों को साथ लेकर जिस तरह हाईकमान पर दबाव बढ़ा रहे थे, उससे पार्टी के विघटन की आशंका बढ़ने लगी थी। प्रधान पद के लिए सिद्धू के अलावा प्रताप बाजवा, रवनीत बिट्टू, पूर्व प्रधान सुनील जाखड़, सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत कई सीनियर नेताओं के नाम सामने आ रहे थे, जिन्होंने सिद्धू की तरह ही अपने हक में समर्थक जुटाने की मुहिम शुरू कर दी थी। सिद्धू जहां शक्ति प्रदर्शन में व्यस्त रहे वहीं बाकी दावेदारों ने दिल्ली के चक्कर लगाकर हाईकमान को प्रदेश इकाई के अंदरूनी और बिगड़ते हालात की लगातार जानकारी मुहैया कराई। शुक्रवार को सुखजिंदर रंधावा द्वारा सिद्धू के खिलाफ जिस शब्दावली का उपयोग करते हुए ट्वीट किया गया, उससे साफ हो गया था कि अगर हाईकमान ने इस बार भी सिद्धू का पक्ष लिया तो कई सीनियर नेता पार्टी से किनारा कर जाएंगे।
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