अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने रविवार को एचएसजीएमसी के नवनियुक्त 11 पदाधिकारियों के कामकाज पर रोक लगा दी। इस आदेश के बाद मामला एक बार फिर गरमा गया है।
एचएसजीएमसी के अध्यक्ष झींडा ने मंगलवार को कैथल में कमेटी की बैठक बुला ली है। माना जा रहा है कि इस बैठक में आगे की रणनीति तय की जाएगी।
जत्थेदार ने नया आदेश जारी करके स्पष्ट कर दिया है कि हरियाणा में बनाई गई हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी एडहॉक किसी भी कीमत पर हरियाणा के गुरुद्वारों के प्रबंधों को अपने हाथों में नहीं लेगी।
SGPC ही देखेगी हरियाणा के गुरुद्वारे का प्रबंधन!
रविवार को जारी आदेशों में जत्थेदार ने एसजीपीसी को ही हरियाणा के 25 बड़े गुरुद्वारों के प्रबंध संबंधी कामकाज पहले की ही तरह देखते रहने के आदेश दे दिए हैं।
इन गुरुद्वारों की औसत वार्षिक आय 30 करोड़ रुपये है। दूसरी ओर, सोमवार को झींडा व कमेटी के अन्य सदस्य अमृतसर में दरबार साहिब माथा टेकने जा रहे हैं।
जत्थेदार ने शनिवार को कहा था कि हरियाणा के सिख नेताओं और पंजाब के अकाली नेताओं को अकाल तख्त पर पेश होकर बातचीत के जरिए मामले का हल निकालना चाहिए।
अकाल तख्त की ओर से जारी आदेश
सहारनपुर हिंसा के मद्देनजर अकाल तख्त के आदेश पर पंजाब में 27 को होने वाली पंथक कांफ्रेंस और करनाल में 28 को होने वाला सिख महासम्मेलन रद्द कर दिए गए थे।
इस बारे में नवगठित एचएसजीएमसी के अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा ने कहा कि अकाल तख्त के आदेश पर मैं कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता। हम मंगलवार को कमेटी की बैठक में चर्चा कर रणनीति तैयार करेंगे।
ये हैं आदेश्ा
1. एचएसजीएमसी के नवनियुक्त 11 सदस्य कामकाज नहीं करेंगे
2. एसजीपीसी ही देखेगी हरियाणा के 25 बड़े गुरुद्वारों का प्रबंधन
3. समाधान होने तक सिख संगठन व संस्थाएं मीडिया को बयान नहीं दें