पीजीआई व पीयू ने अपनी एक स्टडी में पाया था कि मानसून सीजन में वायु प्रदूषण सबसे निचले स्तर पर रहता है। दरअसल बारिश प्रदूषण के कण को हटाने का काम करती है। आमतौर पर मानसून के दौरान एक निश्चित अंतराल में बारिश होती रहती है, लेकिन इस बार स्थिति थोड़ी उलट है। 13 जून से मानसून का आगमन हो चुका है, लेकिन उसके बाद से सूखे जैसे हालात बने हुए हैं। लोगों को बारिश का इंतजार है। हालांकि, अब दस जुलाई से मानसून सक्रिय हो रहा है। इससे अच्छी बारिश के आसार बन रहे हैं। बारिश से धूल के कण छंटेंगे और प्रदूषण से राहत मिलने के आसार हैं।
प्रदूषण बढ़ने की वजह
- लॉकडाउन की पाबंदियां हटना
- सड़कों पर गाड़ियों का आना
- रेस्टोरेंट व होटल में भट्ठी का जलना
- भवन निर्माण का कार्य तेजी से होना
- बारिश का न होना
- आसपास के इलाकों में कूड़े को जलाना
वायु प्रदूषण बढ़ने के एक साथ कई कारण हैं। लॉकडाउन हटने से सभी गतिविधियां शुरू हो गई हैं। आसपास के इलाकों में भवन निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा है। इससे उत्पन्न धूल के कण वातावरण में है। जब तक बारिश नहीं आती, तब तक प्रदूषण से राहत नहीं मिलेगी। बारिश से प्रदूषण के कण घुल जाते हैं। -रविंद्रा खैवाल, एडिशनल प्रोफेसर, स्कूल आफ पब्लिक हेल्थ पीजीआई