पटियाला में आलू की खराब फसल दिखाते किसान।
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दो दिन से पंजाब के अधिकांश हिस्सों में हो रही बारिश से फसलों पर पड़े प्रतिकूल प्रभाव का कृषि विभाग आकलन करेगा। लगातार बारिश के कारण गेहूं के पौध का विकास और आलू की फसल को अधिक नुकसान होने का अनुमान है। साथ ही बागबानी फसलों पर भी कीटों के हमले की किसान संभावना जता रहे हैं।
पंजाब के कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले एक महीने से बादल छाए रहने और कोहरे की वजह से धूप के अभाव में गेहूं के पौधों का विकास पहले ही प्रभावित हो चुका है। कम धूप मिलने के कारण सबसे ज्यादा नुकसान गेहूं को हुआ है। अत्यधिक वर्षा से पौधों पर पानी का दबाव पड़ता है। इसके अलावा मिट्टी, गाद से भी पौधों का विकास प्रभावित होता है। मिट्टी में पानी की अधिक मात्रा के कारण वह खराब हो जाती है, जो पौधों की विकास को रोक देता है। लगातार बारिश से सूबे में गेहूं की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है जिसके बाद पंजाब के कृषि विभाग जल्द ही नुकसान का आकलन करेगा।
लंबे समय तक गीले और आर्द्र मौसम के कारण गेहूं की पौध पर एफिड्स, पीले जंग और अन्य कीड़ों का खतरा बढ़ गया है। गेहूं में लगने वाला पीला रतुआ एक कवक रोग है। साथ ही गेहूं के एफिड्स से संक्रमित होने की संभावना भी बढ़ गई है।
नियमित रूप से करनी होगी देखभाल
इस मौसम के बाद किसानों को सावधान रहने की जरूरत है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. हरपाल पंवार ने किसानों को सलाह दी है कि गेहूं में एफिड्स हमले का पता लगाने के लिए नियमित रूप से अपनी फसलों की जांच करनी होगी, ताकि समय रहते उसके उपाय किए जा सकें।
35 लाख हेक्टेयर में गेहूं की पैदावार
पंजाब में हर साल 35 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की खेती होती है, जिसमें 1.7 से 1.8 करोड़ टन पैदावर होती है। सबसे अहम बात यह है कि कुल उत्पादित गेहूं का 75 फीसदी हिस्सा मंडियों में बिकने आता है।