चंडीगढ़। नवजात शिशु का शव कूडे़दान में फेंकने के आरोपियों निर्मल सिंह और सुखविंदर सिंह उर्फ रिंकू को जिला अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। आरोपी युवकों के वकील स्वराज अरोड़ा और मोहक अरोड़ा ने बताया कि सुनवाई के दौरान आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया था। शिकायतकर्ता के बयान भी पुलिस को दिए बयानों से मेल खाते नजर नहीं आए। इस आधार पर जिला अदालत ने युवकों को आरोपमुक्त कर दिया।
मामला जीएमसीएच-32 के सफाई कर्मचारी बालमुकुंद की शिकायत पर दर्ज किया गया था। बालमुकुंद ने पुलिस को बताया कि 26 जुलाई 2015 को वह कूडे़दान की सफाई कर रहा था। इस दौरान उसे लाल और सफेद रंग के तौलिए में लिपटा एक नवजात बच्ची का शव मिला। इसकी सूचना उसने अपने सुपरवाइजर और पुलिस को दी। बच्ची के शरीर पर एक स्टीकर लगा था जिस पर उसकी मां का नाम मनजीत कौर लिखा था। शिकायतकर्ता ने यह भी बताया कि उसने दो सिख लोगों को उस शव को फेंकते देखा है।
मामले में बचाव पक्ष के वकीलों नेे बताया कि सुनवाई के दौरान क्रॉस एग्जामिनेशन करने के दौरान शिकायतकर्ता बालमुकुंद ने स्वीकार किया कि उसने न तो किसी को शव फेंकते देखा और न ही शव पर कोई टैग लगा था। वहीं, मामले के जांच अधिकारी ने बताया कि बच्ची के शव पर जिस महिला का नाम लिखा था, उससे जांच अधिकारी कभी मिले ही नहीं और न ही उसके बयान नहीं लिए गए।