चंडीगढ़ में फर्जी लोन एप के जरिए लोगों को कर्ज देकर ब्लैकमेलिंग और ठगी के मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में बड़ा खुलासा हुआ है। आरोपियों ने बताया कि गुरुग्राम के उद्योग विहार स्थित चीन की कंपनी पीसी फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड में काम के दौरान उन्होंने ठगी की बारीकियां सीखी थीं। यह कंपनी कैशबीन एप के जरिए लोन देने का काम करती थी।
पुलिस ने बताया कि परवाज आलम, अर्जुन और लेखराज पीसी फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड में काम करते थे। इसी कंपनी में चीन के कई नागरिक भी काम करते थे। करीब ढाई साल पहले कंपनी में ईडी ने छापा मारकर करोड़ों रुपये सीज किए थे। कंपनी बंद होने के बाद आरोपियों ने चीन के नागरिकों से मिलकर ठगी का प्लान बनाया। आरोपियों ने चीन में बैठे कुछ लोगों के साथ मिलकर नेटवर्क को फैलाया और ठगी शुरू कर दी।
आरबीआई ने फरवरी 2022 में पीसी फाइनेंशियल प्राइवेट लिमिटड कंपनी को डी रजिस्टर कर दिया था। इसके बाद कंपनी बंद हो गई थी। इस कंपनी में काम करने वाले लोगों की सूची तैयार की गई है। इसमें कुछ लोगों की पहचान भी कर ली गई है, जिन्होंने आरोपियों की मदद की। पुलिस को शक है कि आरोपियों ने इस कंपनी से डाटा चोरी किया था। चीन में बैठे ट्रे और पीटर से संपर्क बना लिया था।
पुलिस के अनुसार अंशुल ने पिछले दो साल में हवाला के जरिए 100 करोड़ रुपये चीन भेजे। जेफरी दो साल पहले भारत में ही था। उस समय वह खुद पैसों का हिसाब करता था लेकिन जेफरी के जाने के बाद यह काम अंशुल संभाल रहा था। साइबर सेल चीन में बैठे शातिर ठग जेफरी झू, ट्रे और पीटर तक पहुंचने के लिए इंटरपोल की मदद लेगी।
आरोपी गुरुग्राम की पीसी फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड में काम करते थे। कंपनी कैशबीन एप के जरिए लोन देने का काम करती थी। कंपनी में चीन के नागरिक भी काम करते थे। ईडी ने कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की थी। कंपनी बंद होने के बाद आरोपियों ने लोन एप के जरिए ठगी करनी शुरू कर दी। फरवरी 2022 में आरबीआई ने कंपनी को डी रजिस्टर कर दिया था। कंपनी में काम करने वाले लोगों की सूची तैयार कर ली गई है। -केतन बंसल, एसपी सिटी