फतेहगढ़ साहिब से आप के नवनिर्वाचित सांसद हरिंदर सिंह खालसा की जीत सभी के लिए अप्रत्याशित है। अकाली उम्मीदवार कुलवंत सिंह और कांग्रेस के साधु सिंह धर्मसोत ने जहां चुनावी सभाओं में लोगों से संपर्क साधने में कोई कसर नहीं छोड़ी, वहीं खालसा ने अपना नामांकन पत्र 10 अप्रैल को भरने के ठीक दो दिन बाद चुनावी सरगर्मियां तेज कीं।
20 दिन में खालसा ने हलके में बहुत कम चुनावी सभाएं कीं और बहुत ही कम लोगों से मिले। खालसा ने भी यह बात मानी है कि वह किसी भी वोटर के पास वोट मांगने नहीं गए बल्कि लोगों ने अपने जज्बातों पर झाड़ू को अंदर खाते खुलकर समर्थन दिया।
कांग्रेस और अकाली प्र्रत्याशियों ने आम आदमी पार्टी को अपने मुकाबले में समझा ही नहीं था। दोनों पार्टियों के समर्थक आखिर तक अपनी ही जीत का परचम फहराते रहे।
गठबंधन का पूर्ण सफाया हो जाएगा
खालसा का कहना है कि जिस तरह के परिणाम पंजाब में आए हैं, उससे यह साफ जाहिर हो गया है कि 2017 तक कांग्रेस और अकाली-भाजपा गठबंधन का पूर्ण सफाया हो जाएगा। कांग्रेस और अकाली सरकार के खिलाफ लोगों में काफी गुस्सा है और उन्होंने अपने गुस्से का इजहार कर दिया है। लोग अब दोनों पार्टियों से तंग आ चुके हैं और बदलाव चाहते हैं।
फोटो करवाने पर डीसी से बोले ‘सॉरी’
हरिंदर सिंह खालसा शुक्रवार को डीसी दफ्तर में अपनी जीत का प्रमाण पत्र लेने आए तो मीडिया कर्मियों ने उन्हें घेर लिया और उनसे विक्टरी का साइन बनाने की मांग की।
इस पर खालसा ने कहा कि पहले डीसी साहिब से मिल लूं, फिर बात करते हैं। इसके बाद जब वह डीसी कार्यालय में अपनी पत्नी सहित पहुंचे तो वहां भी कुछ समर्थक उनके साथ फोटो खिंचवाने लगे। इस पर खालसा ने डीसी से कहा, सॉरी सर, मैं आपकी उपस्थिति में आपके ही दफ्तर में फोटो शूट करवा रहा हूं। जिस पर डीसी ने उन्हें सिर्फ इतना कहा कि डोंट वरी, सर।
आधा किलो लड्डू बांट मनाई खुशी
फतेहगढ़ साहिब में आम आदमी की जीत की घोषणा के बाद आपस में कुछ पैसे इकट्ठा कर आधा किलो लड्डुओं से ही मुंह मीठा कर एक-दूसरे को बधाई दी। भले ही डीसी कार्यालय में सरकारी कैंटीन पर आम आदमी ने सभी वर्करों को कोल्ड ड्रिंक पिलाई और समोसे खिलाए लेकिन लड्डू बहुत कम बांटे गए। वहीं मंडी गोबिंदगढ़, अमलोह, बस्सी पठाना, खमाणों में वर्कर अपने विजयी उम्मीदवार के दीदार को तरसते रहे और खालसा गोबिंदगढ़ रुकने के बाद लुधियाना अपने घर चले गए।