आम आदमी पार्टी (आप) के पंजाब सह प्रभारी राघव चड्ढा ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बने नवजोत सिंह सिद्धू को बधाई देते हुए राज्य में फैले माफिया से निपटने की चुनौती भी दी है। उन्होंने कहा कि पंजाब कांग्रेस में चल रहे अंदरूनी संघर्ष ने एक बात तो स्पष्ट कर दी है कि सत्ताधारी दल को पंजाब और लोगों से संबंधित मुद्दों की नहीं, सिर्फ अपनी कुर्सी की ही फिक्र है। लग नहीं रहा कि सिद्धू के प्रदेश प्रधान बनने से कांग्रेस की अंदरूनी कलह खत्म हो जाएगी।
राघव चड्ढा ने कहा कि वैसे तो यह कांग्रेस का अंदरूनी मसला है लेकिन सत्ताधारी दल होने के कारण कांग्रेस की खानाजंगी ने पंजाब का बहुत नुकसान किया है। आपसी लड़ाई के कारण पंजाब इनके एजेंडे पर नहीं रहा। साढ़े चार साल की बर्बादी के उपरांत अब उम्मीद करते हैं कि सत्ताधारी कांग्रेस बाकी बचे चंद महीनों का लोगों व प्रदेश की भलाई के लिए सदुपयोग करेगी।
पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठ कर सिद्धू पंजाब के सभी ज्वलंत मुद्दों, भ्रष्टाचार व माफिया के साथ कैसे निपटते हैं। चड्ढा ने कहा कि सबको पता है कि श्री गुटका साहिब की कसम खाने के बावजूद कैप्टन और कांग्रेसी रेत माफिया, लैंड माफिया, ट्रांसपोर्ट माफिया, बिजली माफिया, बेरोजगारी, नशे, कर्ज तले दबे किसान-मजदूर, महिलाएं-बुजुर्गों, मुलाजिमों-पेंशनरों यहां तक कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के मामले में इंसाफ के लिए नहीं लड़े। इसलिए बादलों की तरह कांग्रेस से भी जनता का पूरी तरह से मोह भंग हो गया है। हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि जैसे सत्ता के नशे में सभी हदें पार करने वाले बादलों का मुखौटा उतरा था, उसी तरह कुर्सी के लिए लड़ते कांग्रेसियों का मुखौटा उतर चुका है।
कुर्सी की लड़ाई करेगी कांग्रेस का पंजाब से सफाया : अश्वनी शर्मा
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी शर्मा ने कहा कि अब पंजाब में कांग्रेस की नहीं बल्कि जुमलों व चुटकुलों की सरकार शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच कुर्सी तथा वजूद की चल रही लड़ाई में आखिरकार सिद्धू ने कैप्टन को औंधे मुंह गिरा दिया है।
कांग्रेस ने एक अध्यक्ष व चार कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर फिर से पंजाब को हिंदू और सिखों में बांट दिया है। अश्वनी शर्मा ने कहा कि पंजाब की कांग्रेस सरकार के अत्याचारों के दिन अब लद चुके हैं और जनता इस बार इन्हें ऐसा सबक देगी कि यह लोग दोबारा सत्ता का मुंह नहीं देख पाएंगे।
सिद्धू की गतिविधियों से कांग्रेस हाईकमान भी भली-भांति परिचित है और वह इस कुर्सी और सत्ता की लड़ाई को खत्म करने में विफल साबित हुई है। विधायक नवजोत सिंह सिद्धू पिछले साढ़े चार वर्षों से अपने हल्के से गायब थे और जनता ने उनकी गुमशुदगी के पोस्टर भी लगाए। उन्होंने कहा कि जो नेता अपने हल्के की जनता को लावारिस छोड़ कर गायब हो सकता है, वो पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में क्या संभालेगा।