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शर्मनाकः 5 माह बाद भी नहीं मिली पीएम आवास की किस्त, बिना छत के सो रहे दिव्यांग की ठंड से मौत

Thu, 27 Dec 2018 01:05 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रेवाड़ी (हरियाणा)
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पीड़ित परिवार
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सरकारी योजना की पोल एक बार फिर खुली है। पांच महीने से एक परिवार को पीएम आवास की किस्त का इंतजार था। लेकिन वो नहीं मिली। कड़ाके की ठंड में परिवार बिना छत के मकान में रहने को मजबूर है। अब परिवार  पर दुखों का पहाड़ टूट गया है। परिवार का दिव्यांग मुखिया ने ठंड की वजह से दम तोड़ दिया। मामला हरियाणा के रेवाड़ी के कोसली क्षेत्र के गांव गढ़ी बिसोहा की है।

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 मृतक की दिव्यांग पत्नी का आरोप है कि आवास योजना की पांच माह बाद भी दूसरी किस्त नहीं मिलने के कारण मकान की छत नहीं पड़ी है। दो कमरों के मकान में एक कमरे में पूरी जबकि दूसरे में आधे में टीन शेड पड़ी है। परिवार के छह सदस्य इसमें ही रहते थे। 22 दिसंबर की रात को घर का मुखिया आधे टीन शेड पड़े कमरे में सोया था। सुबह मृत अवस्था में मिला। 

पत्नी का कहना है कि उसके पति की मौत ठंड लगने से हुई है। परिजनों ने पोस्टमार्टम कराए बिना ही शव का अंतिम संस्कार कर दिया। गढ़ी बिसोहा के सरपंच ने ठंड से हुई मौत पर अनभिज्ञता जाहिर की है। उनका कहना है कि दूसरी किस्त डालने की प्रक्रिया चल रही है। मामले में डीसी ने अधिकारियों की टीम भेजकर जांच कराने की बात कही है।    

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खुले में खाना बनाने को मजबूर
गांव गढ़ी बिसोहा निवासी 50 वर्षीय पप्पू सिंह को पंचायत की तरफ से पिछले साल बीपीएल श्रेणी के तहत 100 वर्ग गज का प्लॉट पंचायती भूमि में आवंटित हुआ था। पप्पू सिंह ने मकान बनाने को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवेदन किया। पप्पू सिंह और उसकी पत्नी आशा देवी दोनों ही दिव्यांग होने से घर में आय का कोई जरिया नहीं है। 

खेतों में मजदूरी करके ही अपना पेट पालते थे। आशा देवी के अनुसार पप्पू सिंह के आवेदन करने के बाद प्रथम किस्त के पैसे मिल गए थे। उसने उससे किसी तरह छत तक मकान तैयार कर लिया। फिर उसको द्वितीय किस्त मिलनी थी, लेकिन उसका अभी इंतजार है। इस वजह से वह दो कमरों के मकान में आधा अधूरा टीन डालकर रहने लगा था। आशा देवी ने बताया कि 22 दिसंबर की रात को पप्पू सिंह आधे टीन शेड वाले कमरे में सोया था। 

परिवार के अन्य सदस्य दूसरे कमरे में सोये थे। 23 दिसंबर रविवार सुबह वह मृत अवस्था में मिला। पप्पू सिंह की दिव्यांग पत्नी आशा देवी और अन्य परिजनों का कहना है कि ठंड की वजह से उसकी मौत हुई है। हालांकि पोस्टमार्टम कराए बगैर ही पप्पू सिंह का अंतिम संस्कार कर दिया। गांव गढ़ी के सचिव नरेश कुमार से जब इस देरी का कारण पूछा गया तो उन्होंने बताया कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है।

पत्नी की आंखों से बह रहे हैं बेबसी के आंसू

बिना छत के मकान में रहने को मजबूर
पप्पू सिंह की 46 वर्षीय पत्नी आशा देवी भी दिव्यांग है। दोनों दंपती ही खेतों में जाकर मजदूरी करते थे। दो साल पहले पप्पू सिंह को लकवा लगने के बाद वह भी अधिक समय तक काम नहीं कर पाता था। पति की मौत के बाद दिव्यांग आशा की आंखों से बेबसी के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। आशा के तीन बेटियां और एक बेटा है। आशा ने बताया कि बड़ी बेटी ग्रेजुएशन कर रही है जबकि बेटा बारहवीं कक्षा में पढ़ रहा है। एक बेटी दसवीं कक्षा में पढ़ रही है जबकि सबसे छोटी बेटी चार साल की है।

प्रधानमंत्री आवास योजना में जिओ टैगिंग सिस्टम लागू किया हुआ है। इसमें प्रथम प्रक्रिया पूरी होते ही किस्त जारी कर दी जाती है। इस परिवार का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है और इसके लिए अधिकारियों की टीम को मौके पर भेजकर जांच कराई जाएगी। - अशोक कुमार शर्मा, उपायुक्त।

गांव निवासी पप्पू सिंह की मौत अवश्य हुई है, लेकिन ठंड से होने के संबंध में मुझे जानकारी नहीं है। बीपीएल श्रेणी में होने के कारण उनको प्लॉट पिछले साल ही दिया गया था और इससे पहले इन्होंने कहीं दूसरी जगह मकान बना लिया था। प्रथम किस्त जारी की जा चुकी है और द्वितीय किस्त के कागजात भेजे हैं। - हवा सिंह, सरपंच प्रतिनिधि, गढ़ी।
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इस तरह जारी होता है फंड 

रेवाड़ी
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को कुल 1.38 लाख रुपये की सहायता मकान बनाने के लिए दी जाती है। इसमें प्रथम किस्त के रूप में भूखंड की रजिस्ट्री अथवा मालिकाना हक होने के बाद 45 हजार रुपये जारी किए जाते हैं। इसके बाद फाउंडेशन यानी डीपीसी तक का कार्य पूरा होने के बाद फिर 60 हजार रुपये चौखट तक के निर्माण के लिए जारी किए जाते हैं। 

अंतिम किश्त 33 हजार रुपये की होती है जो कि चौखट तक के कार्य पूरा होने के बाद दस्तावेज जमा कराने के बाद दिए जाते हैं। इस राशि से छत डाली जाती है। अभी सरकार की तरफ से जीओ टैगिंग के तहत तमाम कार्य ऑनलाइन किया हुआ है। इसमें अधिकतम समय 20 दिन के अंदर लाभार्थी के खाते में पैसा आ जाता है।

हालांकि दस्तावेजों में कोई कमी हो या कोई अन्य वजह हो तो उसके बाद इस कार्य में देरी हो सकती है। पप्पू सिंह को प्रथम किस्त लगभग एक साल पहले मिली थी। उसके बाद उसने द्वितीय किस्त के लिए पांच माह पहले ही आवेदन किया था। इसके बाद भी उसको द्वितीय किस्त का पैसा नहीं मिला।

मेरी जानकारी में मामला नहीं है। ग्रामीणों और पंचायत की ओर से ठंड से मौत की जानकारी नहीं मिली है। किस्त न मिलने की कल जांच करवाई जाएगी और जिस स्तर पर भी लापरवाही होगी, उस पर कार्रवाई की जाएगी। - जानकी प्रसाद, बीडीपीओ, रेवाड़ी
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