हरियाणा में पराली जलाने के मामले दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं। प्रदेश में सरकार की तमाम कोशिशों और सख्ती के बावजूद पराली जलाने की घटनाएं अब दोबारा बढ़ने लगी है। अभी तक पराली जलाने के कुल 88 मामले आ चुके है। अधिकारियों के निर्देशानुसार पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 188 के तहत मुकदमा भी दर्ज किया है।
हालांकि, पिछली बार 24 सितंबर 2023 तक राज्य में पराली जलाने के 94 मामले सामने आए थे, इस आधार पर अभी तक छह मामले कम आए है। सरकार की ओर से पराली जलाने से रोकने के लिए किसानों को प्रोत्साहन राशि भी घोषित की गई है। इसके अलावा जागरूकता फैलाने के लिए अलग-अलग कदम उठाए जा रहे हैं।
आंकड़ों के मुताबिक राज्य में 2019 में 6,328 मामले पराली जलाने के आए थे, जबकि 2020 में संख्या घटकर 4,202 हो गई थी। हालांकि, 2021 में संख्या बढ़कर 6,987 हो गई थी। इसके बाद 2022 में 3,661 और 2023 में 2,303 मामले दर्ज किए गए थे। हरियाणा सरकार के निर्देशानुसार संबंधित विभागों की कोशिश से 2022 के मुकाबले 2023 में पराली जलाने के 37 प्रतिशत मामलों में कमी दर्ज हुई थी।
धुआं खतरनाक, कैंसर भी होता है
चंडीगढ़ पीजीआई में सामुदायिक चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर रविंद्र खैवाल ने बताया कि पराली से निकलने वाला जहरीला धुआं आसपास के लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। दरअसल, सर्दियों के कारण धुआं इधर-उधर नहीं होता है और आसपास रहने वाले किसानों के स्वास्थ्य को ज्यादा नुकसान पहुंचता है। इससे 30 प्रतिशत आंख, गले में खरास, त्वचा को नुकसान पहुंचाने के साथ 70 प्रतिशत गंभीर बीमारियों पैदा कर देता है। इसमें कैंसर भी शामिल हैं।