पंजाब में पराली जलाने के मामले 83 फीसदी की कमी दर्ज की गई है लेकिन वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) अब भी खराब श्रेणी में बना है। आंकड़ों के मुताबिक 17 नवंबर के बाद से पराली जलाने के मामलों में लगातार कमी दर्ज की जा रही है। 17 नवंबर को पराली जलाने के 1150 मामले सामने थे। इसकी तुलना में शुक्रवार को पराली जलाने 191 मामले सामने आए हैं। मगर पंजाब की हवा में अब भी प्रदूषण फैला है।
माहिरों के मुताबिक 27 नवंबर को पंजाब में बारिश की संभावना है। इसके बाद से एक्यूआई स्तर में सुधार हो सकता है। इससे हवा में मौजूद धूल के बारीक कण साफ हो जाएंगे। आंकड़ों के मुताबिक 18 नवंबर को पराली जलाने के 637, 19 नवंबर को 740, 20 नवंबर को करीब 600, 21 नवंबर को 513, 22 को 512 और 23 को नवंबर को 205 सामने आए थे।
शुक्रवार को सबसे अधिक पराली मोगा में जली। यहां 54 मामले सामने आए हैं जबकि फाजिल्का में 34, फिरोजपुर में 23, फरीदकोट में 13, बठिंडा में आठ, मानसा व मुक्तसर में 11-11, पटियाला में पांच व संगरूर जिले में आठ मामले रिपोर्ट हुए हैं। शुक्रवार को बीते दो सालों की अपेक्षा ज्यादा पराली जली है। साल 2021 में आज के ही दिन 34 मामले और 2022 में 66 मामले सामने आए थे।
इस वर्ष पराली जलाने के कुल मामले 36514 सामने आए हैं। वहीं 2021 में 71070 और 2022 में 49810 स्थानों पर पराली जली थी। शुक्रवार को बठिंडा का एक्यूआई बेहद खराब श्रेणी में रहा। यहा वायु गुणवत्ता सूचकांक 384 तक पहुंच गया। वहीं अमृतसर का 270, जालंधर का 258, लुधियाना का 236, मंडी गोबिंदगढ़ का 235, पटियाला का 166 व खन्ना का एक्यूआई 183 दर्ज किया गया।