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Punjab: एक दिन में 1921 जगह जली पराली, टूटा दो साल का रिकॉर्ड, पंजाब के कई शहरों का एक्यूआई खराब श्रेणी में

Thu, 02 Nov 2023 10:29 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब)

सार

पराली जलाने के मामलों में तेजी के बीच अब सरकार पराली को प्रदूषण नहीं, बल्कि किसानों के फायदे का सौदा बनाने में जुट गई है। जहां अब कई उद्योग सीधे किसानों से खेतों में जाकर पराली खरीद रहे हैं वहीं, अब गोशालाओं में पशुओं के चारे के लिए भी इसका इस्तेमाल होगा।
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पंजाब में जल रही पराली। - फोटो : फाइल
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विस्तार
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पंजाब में बुधवार को पराली जलाने के मामलों में बीते दो साल का रिकॉर्ड टूट गया है। सूबे भर से एक ही दिन में पराली जलाने के लिए 1921 केस सामने आए हैं। सर्वाधिक 345 मामले सीएम भगवंत मान के जिले संगरूर से सामने आए हैं। 

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पंजाब के कई शहरों का एक्यूआई खराब श्रेणी में रहा। अमृतसर का एक्यूआई 227, लुधियाना का 245, मंडी गोबिंदगढ़ का 259 व बठिंडा का 277 दर्ज किया गया।

सूबे में पराली जलाने के मामलों की संख्या बढ़कर 9594 पहुंच हो गई है। मंगलवार को 1389 मामले रिपोर्ट हुए थे, जिनमें से सबसे अधिक 221 मामले संगरूर के ही थे। बुधवार को तरनतारन जिले से 226, फिरोजपुर से 200, अमृतसर से 86, बठिंडा व फरीदकोट से 97-97, फतेहगढ़ साहिब से 82, कपूरथला से 96, लुधियाना से 75, पटियाला जिले से 127 और जालंधर से 66 मामले रिपोर्ट किए गए।

आंकड़ों के मुताबिक साल 2021 में बुधवार को 1796 व साल 2022 में 1842 मामले रिपोर्ट हुए थे। हालांकि पंजाब में इस सीजन में बीते दो सालों के मुकाबले अब तक 46 फीसदी कम पराली जली है। साल 2021 में इस समय तक पराली जलाने के कुल 14920 और साल 2022 में 17846 मामले रिपोर्ट हो चुके थे।
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गोशालाओं में चारे के लिए जिला एनिमल वेलफेयर सोसाइटी के सहयोग से खरीदी जाएगी पराली
पंजाब में पराली को प्रदूषण नहीं, बल्कि किसानों के फायदे का सौदा बनाने में सरकार जुट गई है। जहां अब कई उद्योग सीधे किसानों से खेतों में जाकर पराली खरीद रहे हैं वहीं, अब गोशालाओं में पशुओं के चारे के लिए भी इसका इस्तेमाल होगा। गोशालाओं के लिए पराली जिला एनिमल वेलफेयर सोसाइटी के सहयोग से खरीदी जाएगी। इसके लिए जिला प्रशासन भी मदद करेगा। 

पंजाब सरकार की तरफ से सभी जिलों के डीसी को हिदायत दी गई है कि वे उन गांवों की पहल के आधार पर निगरानी करें, जहां पर गत समय में पराली जलाने के सबसे ज्यादा मामले सामने आए थे। पर्यावरण मित्र बनकर स्कूली विद्यार्थी जो भूमिका निभा रहे हैं, इससे काफी फायदा मिला है। इसके अलावा आशा वर्कर भी अहम जिम्मेदारी निभा रही हैं। 
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सूबे के 23 जिलों में डीसी अब ऐसे किसानों को तलाश कर उन्हें आम जनता के बीच में लाएंगे, जो पराली का बेहतर तरीके से निष्पादन कर रहे हैं। उनके वीडियो व सफलता की कहानियां सोशल मीडिया में शेयर की जाएंगी, ताकि इलाके के अन्य लोगों को प्रेरणा मिल सके। 

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