चंडीगढ़। केंद्र सरकार के आदेश केबावजूद चंडीगढ़ के हेरिटेज फर्नीचर की विदेश में नीलामी नहीं रुक रही है। वीरवार को फ्रांस के पेरिस में सबसे बड़ी नीलामी है, जिसमें चंडीगढ़ के15 विरासती फर्नीचर करीब 3.34 करोड़ में बिके हैं। हेरिटेज प्रोटेक्शन सेल के सदस्य अजय जग्गा ने नीलामी की जानकारी पहले ही केंद्र सरकार को दे दी थी, इसके बावजूद नीलामी को रोका नहीं जा सका।
नीलामी में चंडीगढ़ प्रशासनिक भवन, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट और छात्रावास के कुर्सी, टेबल, स्टूल, स्क्रीन समेत 15 आइटम्स को रखा गया था। इनकी कुल कीमत तीन करोड़ रुपये के करीब आंकी गई थी, लेकिन नीलामी में ये फर्नीचर कई गुना दाम में बिके। चंडीगढ़ प्रशासनिक भवन दो फैब्रिक कुर्सियां करीब 78.12 लाख रुपये में बिकी हैं। इसके अलावा डेबेड टीक एंड लेदर 27.90 लाख और छात्र आवास का एक टेबल करीब 14.50 लाख रुपये में बिका है। जग्गा ने कुछ दिन पहले नीलामी की जानकारी केंद्रीय संस्कृति मंत्री जी. किशन रेड्डी, संस्कृति राज्य मंत्री अर्जुन आर मेघवाल, फ्रांस केसंस्कृति मंत्री रोजलीने बैचेलो को दी थी और नीलामी को रोकने की मांग की थी।
जग्गा ने बताया कि वर्ष 2021 में अब तक विदेशों में करीब 12 बार चंडीगढ़ का हेरिटेज फर्नीचर नीलाम हो चुका है। शिकायत में जग्गा ने कहा है कि पूरे मामले की जांच होनी चाहिए कि आखिरकार देश से बाहर ये हेरिटेज फर्नीचर पहुंच कैसे रहा है। जो भी फर्नीचर की तस्करी में शामिल हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। इसके अलावा यहां स्थानीय स्तर पर भी चोरी रोकने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए। पिछले कुछ साल में शहर के करोड़ों के हेरिटेज फर्नीचर की यूएसए, यूके, फ्रांस व जर्मनी समेत अन्य देशों में नीलामी हो चुकी है।
क्यों विदेशों में लाखों में नीलाम होते हैं चंडीगढ़ के फर्नीचर?
ली कार्बूजिए और पियरे जेनरे के काम को पसंद करने वालों की संख्या करोड़ों में है। उनके चाहवान कीमत की परवाह किए बिना उनके डिजाइन सामानों को खरीदते हैं। ली कार्बूजिए और पियरे जेनरे ने चंडीगढ़ में काफी साल काम किया, इसलिए उनके डिजाइन किए कई सामान चंडीगढ़ में बिखरे पड़े हैं। इन फर्नीचरों की मांग बहुत ज्यादा है।