प्रदूषण को नियंत्रण करने के लिए राज्य सरकार ने बनाई योजना
चंडीगढ़। हरियाणा ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए 2024-25 की कार्ययोजना तैयार कर ली है। इसके तहत राज्य के बस बेड़े में इलेक्ट्रिक, सीएनजी और बीएस-6 पर आधारित डीजल की बसें शामिल की जाएंगी। 12 मीटर की 375 ई-बसें राज्य के नौ नगर निगमों में जून 2024 तक आ जाएंगी। मुख्य सचिव संजीव कौशल ने यह जानकारी दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में वायु गुणवत्ता प्रबंधन पर केंद्रीय कैबिनेट सचिव की ओर से बुलाई बैठक में दी।
उन्होंने बताया कि हरियाणा ने वित्तीय वर्ष के दौरान नवीनतम बीएस-6 उत्सर्जन मानदंडों को पूरा करने वाली 500 नई डीजल बसें और 150 एचवीएसी बीएस-6 डीजल बसों को बेड़े में शामिल करने की योजना बनाई है। इस प्रकार से कुल 1025 प्रस्तावित बसें नवंबर 2024 तक बेड़े में शामिल कर ली जाएंगी। उन्होंने बताया कि बीते साल 10 साल पुराने डीजल के 185 और 15 साल पुराने 461 वाहनों को जब्त किया गया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में राज्य के बेड़े में बीएस-3 अनुपालित डीजल बसों की संख्या करीब 1030 है। इनमें से 500 बसें एनसीआर डिपो में संचालित होती हैं। कौशल ने बताया कि अक्तूबर 2024 तक सभी 500 बीएस-3 बसों को कंडम कर दिया जाएगा और एनसीआर डिपो से चरणबद्ध तरीके से हटा दिया जाएगा।
धूल नियंत्रण के लिए बनाया प्रबंधन सेल
कौशल ने बताया कि एनसीआर में धूल प्रबंधन के लिए यूएलबी, पीडब्ल्यूडी, एचएसवीपी, एनएचएआई और एचएसआईआईडीसी का एक प्रबंधन सेल का गठन किया गया और साथ ही नोडल आफिसर नियुक्त किए गए हैं। एचएसपीसीबी ने एनसीआर में 500 वर्ग मीटर या उससे अधिक के भूखंड क्षेत्र पर निर्माण परियोजनाओं की ओर से पंजीकरण के लिए धूल प्रदूषण नियंत्रण स्व-मूल्यांकन के लिए वेब पोर्टल चालू कराया है। 16 जनवरी 2024 तक 738 साइटें पंजीकृत की गई हैं। 534 स्थानों पर एनसीआर के निर्माण स्थलों पर एंटी स्मॉग गन लगाई गई हैं। ग्रुरुग्राम, पानीपत और सोनीपत में प्रदूषण के स्तर और कार्बन उत्सर्जन की जांच का काम ऑटोमेटिव रिसर्च एसोसिएशन पुणे को सौंपा गया है।
पराली का किया जा रहा है उचित प्रबंधन
पराली प्रबंधन के लिए आईओसीएल की ओर से बहोली पानीपत में 100 केएलपीडी क्षमता का धान का भूसा (पराली) आधारित 2जी एथेनॉल संयंत्र स्थापित किया है, जो यह सालाना 2 लाख मीट्रिक टन पराली की खपत करेगा। प्रदेश में 2.30 लाख टीपीए की कुल क्षमता के साथ 23 फसल अवशेष आधारित ब्रिकेटिंग संयंत्र चालू हैं। प्रदेश के थर्मल पावर स्टेशन बिजली उत्पादन के लिए आगामी सीजन से कोयले के साथ मिलाकर ईंधन के रूप में 5-7 प्रतिशत पराली का उपयोग करेंगे। इसके लिए ऊर्जा विभाग (एनआरई) ने थर्मल पावर स्टेशनों के लिए धान की पराली के लिए सेवा क्षेत्र आवंटित किए हैं।