केंद्र सरकार की ‘प्रधानमंत्री आवास योजना-अर्बन हाउसिंग फॉर ऑल’ योजना का चंडीगढ़ के लोगों को कुछ खास लाभ नहीं मिला है। योजना के लांच होने के बाद चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने कहा था कि जिनके नाम पर कहीं भी कोई संपत्ति नहीं हो, उन्हें बना बनाया मकान दिया जाएगा। इसके लिए करीब सवा लाख लोगों ने आवेदन किया। कई चरणों के बाद 444 लोग छांटे गए लेकिन आज तक एक को भी मकान नहीं मिला। हां इतना जरूर है सीएचबी ने 1580 लोगों को घर लेने के लिए लोन दिलाया है।
आवेदन के बाद जो लोग मकान के इंतजार में बैठे थे, सीएचबी उन्हें लोन लेकर खुद कहीं और घर लेने की सलाह दे रहा है। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि वो किसी को भी मकान बनाकर नहीं देंगे। सवा लाख लोगों में से 10,132 लोगों को सफल पाया था। इसके बाद कई तरह के सर्वे किए गए और फिर सीएचबी ने 444 लोगों की आखिरी सूची जारी की। इन परिवारों को योजना के तहत मकान बनाकर देना था। पिछले करीब ढाई साल से ये लोग पक्की छत के इंतजार में बैठे थे।
हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि चंडीगढ़ में जमीन कम है और जो जमीन बोर्ड के पास है, उसका दाम काफी ज्यादा है। चंडीगढ़ प्रशासन ने केंद्र को पत्र भेजकर पीएमएवाई प्रोजेक्ट के लिए 3.1 करोड़ रुपये प्रति एकड़ के रेट पर जमीन की मांग की थी, लेकिन केंद्र ने प्रशासन की मांग को ठुकराते हुए जमीन को मार्केट रेट से कम पर देने से इंकार कर दिया था। ऐसे में प्रशासन ने हाथ खड़े कर दिए और आवेदकों को क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम (सीएलएसएस) में ही विलय कर दिया गया।
केंद्र ने चंडीगढ़ को अब एक हजार का दिया लक्ष्य
सीएलएसएस के तहत अब तक 1580 लोगों ने लोन लेकर मकान खरीदा है। केंद्र सरकार ने योजना के लिए चंडीगढ़ को पहले 4000 का लक्ष्य दिया था, जिसे फिर एक हजार कर दिया गया। ये लक्ष्य मार्च 2022 तक के लिए है। इस योजना के तहत जहां मकान खरीदा जाता है, उस व्यक्ति को उस राज्य व केंद्र शासित की योजना में गिना जाता है। उदाहरण के तौर पर अगर कोई व्यक्ति चंडीगढ़ में रहता है और योजना के तहत चंडीगढ़ से ही लोन लेकर जीरकपुर या मोहाली में मकान खरीदता है तो वह पंजाब राज्य का लाभार्थी माना जाएगा, न कि चंडीगढ़ का। चंडीगढ़ में जमीन महंगी है, इसलिए सरकारी कर्मी भी जीरकपुर, मोहाली, पंचकूला, डेराबस्सी आदि में ही मकान खरीदते हैं। ऐसे में चंडीगढ़ ने यह मुद्दा केंद्र के समक्ष उठाया और फिर चंडीगढ़ के लक्ष्य को 1000 कर दिया गया।
चंडीगढ़ में जमीन काफी महंगी है। अगर योजना के तहत घर बनाकर दिए जाते तो ये लोगों को काफी महंगे पड़ते। इसलिए क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम (सीएलएसएस) के तहत लोगों को लोन दिलाए जा रहे हैं। इसमें लक्ष्य से ज्यादा चंडीगढ़ ने हासिल किया है। - यशपाल गर्ग, सीईओ, सीएचबी