ग्रामीण इलाकों पर लगा अंगूठा छाप का कलंक मिटाने के लिए चल रही साक्षर भारत मिशन योजना में इस बार 20 मार्च को 108 केंद्रों पर होगी। परीक्षा में जिले के चार हजार निरक्षर परीक्षा देंगे।
पंचायती राज संस्थाओं में चुनाव लडने के लिए शैक्षणिक योग्यता का नियम लागू होने के बाद गांवों में साक्षरता के लिए होड़ बढ़ी है। लोगों का रुझान ऐसा ही रहा तो वे अगले दो-तीन वर्षो में पूरी तरह से जिले में निरक्षता का अभिशाप मिट जाएगा। वहीं, पिछले तीन सालों में ही साक्षरता दर में 7 प्रतिशत का सुधार हुआ है।
साक्षर भारत मिशन की परीक्षा के लिए जिले के 108 गांवों में सेंटर बनाएं है। परीक्षा सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक होगी। परीक्षा में पास होने वालों को राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय व साक्षर भारत मिशन की ओर से कक्षा तीसरी का सर्टिफिकेट दिया जाएगा। परीक्षा वाले दिन अभ्यार्थी तय समय में आकर कभी भी परीक्षा दे सकता है।
साक्षर भारत मिशन अभियान जिले में वर्ष 2013 में शुरू किया गया था। इस अभियान के तहत जिले में अब तक 10 हजार 863 अनपढ़ लोग साक्षर बन चुके हैं। इसके साथ उन्हें विभाग की ओर से कक्षा तीन का पड़ाव पास करने का प्रमाण पत्र भी दिया जा चुका है।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इससे जिले की साक्षरता दर बढ़ी है। वहीं, जिले में साक्षरता दर 2011 की मतगणना के अनुसार 83 प्रतिशत है। इसमें अब सुधार आया है।
विभाग के अधिकारियों का दावा है कि साक्षर भारत मिशन के कारण अब जिले की साक्षरता दर 90 प्रतिशत से अधिक है। स्थानीय सांसद एवं केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर के गोद लिए गए गांव तिलपत में अब 267 लोग निरक्षर बचे हैं। जिन्हें 20 मार्च को परीक्षा देने का मौका दिया जाएगा। संभावना है कि परीक्षा उर्तीण कर आदर्श गांव में कोई व्यक्ति अंगूठा छाप नहीं होगा।
प्रदेश सरकार द्वारा पंचायती राज संस्थाओं व नगर निकाय संस्थाओं में चुनाव लडने के लिए शैक्षणिक योग्यता तय की है। इससे लोगों में शिक्षा के प्रति जागरूकता आई है। अब लोग खुद आकर उनके सेंटर में पढना चाहते है। इस कारण जिले में चार हजार से ज्यादा लोग परीक्षा देंगे। जो पिछले साल के मुकाबले सात सौ ज्यादा है। -सुनील कुमार, जिला समन्वयक, भारत साक्षर मिशन