चंडीगढ़ के प्राइवेट स्कूलों में सेशन शुरू होने से छात्रों में नई एनसीईआरटी किताबें खरीदने की होड़ लगी है, लेकिन उन्हें सभी किताबें नहीं मिल रही हैं। इसका मुख्य कारण शहर में एनसीईआरटी की अधिकृत दुकानों की कमी होना है। शहर में कुल करीब 200 स्कूल हैं, जबकि एनसीईआरटी की अधिकृत दुकानें सिर्फ तीन ही हैं।
ऐसे में सभी कक्षाओं की किताबें नहीं मिल पा रही हैं। कुछ विषयों में अंग्रेजी माध्यम की पुस्तकें मिल रही हैं तो कुछ विषयों में हिंदी माध्यम में। नौवीं व दसवीं कक्षा की सभी पुस्तकें बाजार में नहीं हैं। खासकर इतिहास और भूगोल की पुस्तकों की कमी है। इसी तरह 11वीं व 12वीं कक्षाएं की सभी पुस्तकें भी नहीं मिल रही हैं।
एनसीईआरटी किताबों की डिमांड ज्यादा, सप्लाई कम
सीबीएसई से संचालित देशभर के स्कूलों में सभी कक्षाओं में अधिक से अधिक एनसीईआरटी की किताबें पढ़ाए जाने के निर्देश हैं। इसके लिए एनसीईआरटी की किताबों की उपलब्धता पर भी विशेष जोर दिया जाता है। मानव संसाधन मंत्रालय की ओर से इसे लेकर निर्देश जारी किए गए हैं। लेकिन अभी तक पर्याप्त मात्रा में एनसीईआरटी की किताबें बाजार में उपलब्ध नहीं हो पाई हैं।
खासकर पहली से पांचवीं कक्षा तक के बच्चों की एनसीईआरटी की किताबें बाजार में नहीं मिल पा रही हैं। एनसीईआरटी किताबों की डिमांड ज्यादा है, लेकिन सप्लाई काफी कम है। अधिकांश प्राइवेट सीबीएसई स्कूल इन किताबों को लेकर गंभीर नहीं हैं। बहुत से स्कूलों में बड़ी कक्षाओं में एनसीईआरटी की किताबें लगाई गई हैं तो छोटी कक्षाओं में वही महंगी प्राइवेट किताबें चल रही हैं।
प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें महंगी
कई प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें एनसीईआरटी की किताबों के मुकाबले 300 से 500 फीसदी अधिक महंगी हैं। कुछ स्कूल एनसीईआरटी की किताबों को सामान्य कोर्स मानकर प्राइवेट किताबें चला रहे हैं तो कुछ स्कूल संचालकों की मानें तो एनसीईआरटी की किताबें बाजार में उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। इसकी वजह से मजबूरी में उन्हें प्राइवेट किताबों से ही पढ़ाई करानी पड़ रही है।
ई-पाठशाला है विकल्प
एनसीईआरटी ने अपनी सभी किताबों को ऑनलाइन वेबसाइड ई-पाठशाला पर अपलोड किया है। ई-पाठशाला में किसी भी विषय की किताब को डाउनलोड किया जा सकता है। हर वर्ग में कई विषय दिए गए हैं, जैसे कला में आर्किटेक्चर, कम्परेटिव लिटरेचर, कम्परेटिव स्टडी, इतिहास, गृह विज्ञान, डांस, विजुअल आर्ट्स के विषय उपलब्ध हैं।
सप्लाई कम हुई तो बुक स्टोर पर बिकने लगी नकली किताबें
बीते दिनों शहर के दो बुक स्टोर पर दिल्ली एनसीईआरटी की टीम ने छापा मारा था। एनसीईआरटी को शिकायत मिली थी कि सेक्टर-22 स्थित हैप्पी बुक डिपो और सेक्टर-23 स्थित सुरेश बुक डिपो पर नकली किताबें बेची जा रही हैं। चंडीगढ़ और दिल्ली की ज्वाइंट टीम ने चेकिंग के दौरान हैप्पी बुक डिपो से 38 और सुरेश बुक डिपो से 4 किताबें सैंपल के तौर पर ली हैं, जो नकली प्रतीत होती हैं। टीम ने इन किताबों को चेकिंग के लिए दिल्ली भेज दिया है। रिपोर्ट में अगर किताबें नकली पाई जाती हैं तो इन दुकानों का लाईसेंस भी सस्पेंड किया जा सकता है।
ये हैं एनसीईआरटी की अधिकृत तीन दुकानें
- मनचंदा बुक स्टोर, सेक्टर-19सी
- मॉर्डन बुक शॉप, सेक्टर-22सी
- रमेश बुक शॉप, सेक्टर-23सी
एनसीईआरटी की किताबों में क्या है खास
एनसीईआरटी (नेशनल काउंसिल ऑफ एड्युकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग) एक सरकारी संस्था है और केंद्र सरकार द्वारा स्थापित है। यह पुस्तकें अनुभवी टीचर्स द्वारा लिखी गई और कई बार प्रूफ रीड भी हुई हैं, इसलिए एनसीईआरटी पाठ्य पुस्तकों में दिए गए कॉन्सेप्ट्स सटीक और स्पष्ट होते हैं। यह पुस्तकें सिर्फ परिभाषाएं और सूत्रों को रटने पर जोर नहीं देती बल्कि यह विषय की गहरी समझ देती हैं।
कई बार प्रतियोगी परीक्षा, जैसे- नीट, नेट जेई मेन आदि में एनसीईआरटी किताबों से सीधे सवाल पूछे गए हैं, इसलिए इन किताबों का महत्व और ज्यादा बढ़ जाता है। यह किताबें कई भाषाओं में प्रकाशित होती है जिससे इन्हे कोई भी आसानी से पढ़ और समझ सकता है। सबसे बड़ी बात इन किताबों की सिफारिश खुद सीबीएसई करती है।
अधिकृत दुकानों की संख्या बढ़ाए एनसीईआरटी
एनसीईआरटी की किताबों की अगर कमी है, तो उसे पूरा किया जाना चाहिए। एनसीईआरटी को अपने अधिकृत दुकानों की संख्या भी बढ़ानी चाहिए। लेकिन विभाग नकली किताबें बेचने वाले बुक स्टोर्स पर कार्रवाई जारी रखेगा।
- बीएल शर्मा, एजुकेशन सेक्रेटरी