पंजाब यूनिवर्सिटी परिसर की सुरक्षा राम भरोसे नजर आने लगी है। खुलेआम छात्राओं से छेड़छाड़ और खूनी संघर्ष को आउटसाइडर अंजाम देने लगे हैं। वहीं, इसका जिम्मेवार परिसर की सुरक्षा, छात्र नेताओं की पुलिस एंट्री बैन की मांग और वारदात के बाद सुधार नही होना है।
पंजाब यूनिवर्सिटी में शुक्रवार को फैशन शो के बाद आठ गोलियां चलाकर आउटसाइडर फरार हो गए। इस घटना में चार लोग घायल हुए थे। पीयू में इस तरह की हिंसक वारदात पहली बार नहीं हुई है। पीयू सिक्योरिटी पर सवाल उठने के बाद हर बार सुरक्षा बढ़ा दी जाती है। लेकिन, बाद में माहौल जस का तस हो जाता है।
छात्रों ने किया था पुलिस एंट्री बैन की मांग:
कुछ दिनों पहले दोनों छात्र संगठनों ने पत्र लिखकर मांग की थी कि पीयू कैंपस में सुरक्षा संबंधी जिम्मदारी के साथ ही शिकायतों की जांच का काम सिक्योरिटी गार्डों को सौंपी जानी चाहिए। पुलिस यूनिवर्सिटी परिसर में घुसकर मनमानी करती है।
आउट साइडर्स पर लगाम नहीं
पंजाब यूनिवर्सिटी में हर बड़ी वारदात में आउट साइडर शामिल पाए गए हैं। आउट साइडर्स की एंट्री बैन करने या इनका रिकार्ड दर्ज करने का मामला कई बार उठ चुका है। वहीं, पीयू चुनाव से समय देर पुलिस की छापामारी में पीयू हास्टलों में 300से ज्यादा आउट साइडर पकड़े गए थे।
छेड़खानी पर लगाम नहीं
पंजाब यूनिवर्सिटी के हॉस्टलों में रहने वाली छात्राओं में मनचलों की वजह से दहशत का माहौल है। आए दिन कैंपस में मनचले छात्राओं से खुलेआम बदसलूकी करते हैं। जबकि, पीयू सिक्योरिटी सिर्फ पुलिस को सूचना देने तक सीमित रहती है। हालांकि, कभी कभी सिक्योरिटी चेकिंग हॉस्टल के बाहर भी की जाती है। लेकिन, इस दौरान मनचले अपना रास्ता बदल लेते हैं। जबकि, सुरक्षा अंदर गेट से पुख्ता होनी चाहिए।
सीआईडी भी जानकारी देने में नाकाम
पीयू में तैनात सीआईडी की ओर से किसी वारदात और घटना का संकेत पुलिस को नहीं मिलता है। सूत्रों की माने तो सीआईडी पीयू में फेल रही है। पीयू में छेड़खानी की कई घटनाओं के साथ ही हास्टल में छात्र पर चाकू से हमला, आउटसाइडर की बालकनी से गिरकर मौत, छात्र गुटों में बवाल आदि शामिल हैं।
नरेंदर पटियाल, थाना प्रभारी, सेक्टर-11 ने बताया कि पीयू परिसर की सुरक्षा उनकी खुद के सिक्योरिटी के हाथ में है। सूचना मिलने केबाद पुलिस अपनी कार्रवाई करती है। लेकिन, वारदात को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है।