खुदरा महंगाई के बाद थोक मूल्य आधारित महंगाई दर (डब्ल्यूपीआई) ने भी फरवरी में बड़ा झटका दिया है। सरकार ने सोमवार को बताया कि फरवरी, 2021 मेें थोक महंगाई की दर 4.17 प्रतिशत के साथ 27 महीने के शीर्ष पर पहुंच गई। यह जनवरी के 2.03 प्रतिशत के मुकाबले दोगुनी से भी ज्यादा है, जबकि पिछले साल फरवरी में थोक महंगाई की दर 2.26 फीसदी थी। नवंबर, 2018 में थोक महंगाई 4.60 फीसदी थी।
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, खाने-पीने की चीजें व पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से थोक महंगाई में यह उछाल आया है। फरवरी में खाद्य महंगाई 3.31 प्रतिशत रही, जो जनवरी में (-) 0.26 प्रतिशत थी। दालों की थोक महंगाई दर 10.25 प्रतिशत, जबकि फलों के थोक भाव में 9.48 प्रतिशत का उछाल आया।
ईंधन और ऊर्जा की थोक महंगाई 13.2 प्रतिशत रही, तो पेट्रोल की कीमतों में 0.83 प्रतिशत उछाल आया। जनवरी में पेट्रोल की थोक महंगाई (-) 10.29 प्रतिशत थी। थोक महंगाई में 64.23 प्रतिशत हिस्सेदारी वाले फैक्ट्री विनिर्मित उत्पादों का डब्ल्यूपीआई फरवरी में 5.81 फीसदी रहा, जो जनवरी में 5.13 प्रतिशत था।
मार्च में 6 प्रतिशत थोक महंगाई का अनुमान
रेटिंग एजेंसी इक्रा के अनुसार, मार्च में थोक महंगाई की दर 6 फीसदी पहुंच सकती है। हालांकि, 2021 के आखिर तक यह 4 फीसदी के आसपास बनी रहेगी। केयर रेटिंग्स ने भी मार्च में महंगाई और बढ़ने का अनुमान लगाया है, जिसमें ईंधन की बड़ी भूमिका होगी।
बार्कलेज ने सितंबर, 2021 तक औसत महंगाई दर 5.2 फीसदी और दूसरी छमाही में 4.5 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है। नोमुरा ने भी इस साल औसत महंगाई 5 फीसदी के आसपास रहने का अनुमान लगाया है, जबकि बुनियादी क्षेत्र की महंगाई दर 5.5 फीसदी हो सकती है।
रेपो रेट घटने की उम्मीदों को झटका
अप्रैल में होने वाली वित्तवर्ष 2021-22 की पहली मौद्रिक समिति मेें रिजर्व बैंक एक बार फिर रेपो रेट स्थिर रख सकता है। इक्रा रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर का कहना है कि फरवरी में खुदरा महंगाई 5 फीसदी से ऊपर और थोक महंगाई दो साल के शीर्ष पर जाने से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को झटका लग सकता है। आरबीआई महंगाई दर के आधार पर ही रेपो रेट घटाने का फैसला करता है।