कोरोना काल में देश में आर्थिक गतिविधियों पर विपरीत असर पड़ा है। कोरोना का काबू करने के लिए देशभर में लगाए गए लॉकडाउन से कई कंपनियां या तो बंद हुई हैं या फिर उनमें खर्चों में भारी कटौती को देखा गया है। लॉकडाउन की वजह से कई लोगों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा तो कई लोगों की सैलरी में कटौती की गई।
इसके अलावा जो लोग नौकरीपेशा नहीं थे और जिनका अपना व्यवसाय था, उनकी कमाई पर लॉकडाउन का गहरा असर पड़ा है। कई दिनों तक दुकानें और व्यापार बंद होने की वजह से कमाई रुक सी गई और आमदनी पर विपरीत असर पड़ा। व्यापार में हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए लोगों ने या तो अपने रिश्तेदारों से पैसों की मदद मांगी या फिर दोस्तों से।
कुछ लोगों ने बैंक का भी रुख अपनाया और पर्सनल लोन के लिए अप्लाई किया। बैंक पर्सनल लोन पर ब्याज की दरें बहुत ज्यादा देते हैं। ये बात बहुत कम लोगों को पता होती है कि बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट पर भी लोन देते हैं और उनकी ब्याजें दरें पर्सनल लोन से काफी कम होती हैं। अगर आपने पहले से ही फिक्स्ड डिपॉजिट कराया हुआ है तो बेहतर है आप पर्सनल लोन की बजाय उस पर लोन की सुविधा लें।
जानकारी के अभाव में लोग महंगे लोन लेते हैं जबकि कई बैंक ऐसे हैं जो फिक्स्ड डिपॉजिट पर छह फीसदी से भी कम ब्याज पर लोन की सुविधा दे रहे हैं। एफडी नियमों के मुताबिक ग्राहक अपनी एफडी पर 90 फीसदी तक लोन ले सकते हैं। इसका मतलब यह हुआ कि अगर आपने एक लाख की एफडी कराई है तो आप 90,000 रुपये का लोन ले सकते हैं।
एफडी पर लिए जा रहे लोन की रकम आपकी एफडी की राशि पर निर्भर करती है। ग्राहक ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही तरीकों से लोन के लिए अप्लाई कर सकते हैं। ऑनलाइन के मुकाबले ग्राहकों को ऑफलाइन के जरिए ज्यादा लोन मुहैया कराया जाता है।