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चिंता-मनी 13ः क्या मुझे एनपीएस खाता खोलना चाहिए?

Thu, 27 Aug 2020 02:06 PM IST
नारायण मूर्ति नारायण कृष्णमूर्ति, आर्थिक सलाहकार, नई दिल्ली

सार

पच्चीस साल की सृष्टि बंसल एनपीएस में निवेश करना चाहती है, जबकि उसके पिता उसे पीपीएफ में निवेश के लिए कह रहे हैं। सृष्टि को वृद्धावस्था पेंशन के लिए एनपीएस खाता खोलना चाहिए। एनपीएस में निवेश सबसे किफायती और टैक्स लाभकारी है।
 
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निवेश - फोटो : pixabay
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विस्तार
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सृष्टि बंसल दुविधा में है, क्योंकि उसके पिता उसे पीपीएफ खाता खोलने के लिए कह रहे हैं, जबकि वह एनपीएस (नेशनल पेंशन सिस्टम) में खाता खोलना चाहती है। वह जानना चाहती है कि एनपीएस खाता खोलने का फैसला सही रहेगा या नहीं। पच्चीस साल की सृष्टि के लिए लॉकडाउन वरदान बनकर आया है, क्योंकि उस निजी स्कूल ने उसे अब स्थायी कर दिया है, जिसके प्रशासनिक विभाग में वह काम करती है। स्थायी नौकरी का मतलब है कि अब वह वेतनभोगी कर्मचारी है, लिहाजा उसे टैक्स बचाने के विकल्पों पर विचार करना है।

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खुद वह एनपीएस में निवेश करना चाहती है, जबकि उसके 56 वर्षीय पिता चाहते हैं कि सृष्टि रिटायरमेंट सेविंग्स के लिए पीपीएफ खाता खोले। यह दरअसल पीढ़ीगत सोच का फर्क है, जिसका सामना अनेक कामकाजी युवा करते हैं। अमूमन अभिभावक चाहते हैं कि उनके बच्चे धन का सही प्रबंधन करें। लेकिन बच्चों का भला चाहते हुए भी वे अक्सर वही गलतियां कर जाते हैं, जो उन्होंने अपनी युवावस्था में की थी।

एनपीएस का ढांचा

एनपीएस एक स्वैच्छिक रिटायरमेंट स्कीम है, जिसमें वृद्धावस्था पेंशन के लिए बचत की जा सकती है या रिटायरमेंट के बाद उपयोग करने के लिए एक फंड बनाया जा सकता है। 1 जनवरी, 2004 को यह योजना सिर्फ सरकारी कर्मचारियों के लिए लांच की गई थी, पर 1 जनवरी, 2009 से यह योजना देश के सभी नागरिकों के लिए लागू कर दी गई। एनपीए को पीएफआरडीए (पेंशन फंड रेगुलेटरी ऐंड डेवलेपमेंट अथॉरिटी) विनियंत्रित करता है। यह योजना 18 से 65 साल के तक के सभी लोगों के लिए है।

अधिकतम 60 साल की उम्र तक एनपीएस खाता खोला जा सकता है और 70 की उम्र तक इसमें निवेश किया जा सकता है। ढांचागत रूप से एनपीएस के तहत दो अलग-अलग खाते होते हैं-टायर 1 और टायर 2। टायर 1 खाते से 60 साल की उम्र तक पैसा नहीं निकाला जा सकता। हालांकि कुछ खास स्थितियों, जैसे-गंभीर बीमारी, बच्चों की शिक्षा, बच्चों की शादी, घर खरीदने या बनाने के लिए इससे आंशिक निकासी की जा सकती है। एनपीएस का ढांचा इस तरह तैयार किया गया है कि इसमें अधिकतम लॉक इन है, ताकि इस राशि का इस्तेमाल रिटायरमेंट के बाद किया जा सके।

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एनपीएस के टायर 1 में 500 रुपये से और टायर 2 में 1,000 रुपये से रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है। उसके बाद इन खातों में निवेश की रकम और निवेश की अवधि कुछ भी हो, लेकिन टायर 1 में 1,000 और टायर 2 में 250 रुपये का सालाना निवेश करना ही होगा। एनपीएस में निवेश मार्केट लिंक्ड होता है, जिसके तहत तीन अलग-अलग फंडों में इन्हें डाला जाता है, जिन पर एसेट क्लासेज का नियंत्रण होता है।

एनपीएस के तहत एसेट क्लासेज में भी निवेश किया जा सकता है। एनपीएस का लाभदूसरे रिटायरमेंट सेविंग्स के विपरीत एनपीएस लगभग फिक्स्ड रिटर्न्स इन्स्ट्रुमेंट्स से लेकर इक्विटी एलोकेशन तक में निवेश का विकल्प मुहैया कराता है।

अपनी उम्र के मुताबिक, आपके पास ऑटोमैटिक एसेट एलोकेशन रूट के जरिये इन विकल्पों को मिलाकर निवेश करने की भी सहूलियत है। जब गारंटेड रिटर्न स्कीम में ब्याज दर घटने लगती है, तब मार्केट लिंक्ड स्कीम में निवेश करना ही समझदारी है। यह युवाओं के लिए अच्छा है, जिनके सामने 20 से 30 साल का करियर है। इक्विटी में निवेश करने से लंबी अवधि में जो रिटर्न मिलता है, वह संपत्ति निर्माण में मददगार होता है।


फिलहाल इसमें रजिस्ट्रेशन शुल्क 200 रुपये है, तो आपके खाता खोलने का खर्च 40 रुपये, खाते के सालाना रख-रखाव का खर्च 60 से 95 रुपये के बीच और हर ट्रांजेक्शन का खर्च करीब 3.75 रुपये पड़ेगा। इसी तरह, एसेट के प्रबंधन के लिए पेंशन फंड मैनेजर 0.01 फीसदी वसूलेगा और एसेट सर्विसिंग के लिए कस्टोडियन चार्ज 0.0032 प्रतिशत होगा। ये सारे तथ्य बताते हैं कि एनपीएस में निवेश किफायती और टैक्स बचाव में सहायक है।

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