सृष्टि बंसल दुविधा में है, क्योंकि उसके पिता उसे पीपीएफ खाता खोलने के लिए कह रहे हैं, जबकि वह एनपीएस (नेशनल पेंशन सिस्टम) में खाता खोलना चाहती है। वह जानना चाहती है कि एनपीएस खाता खोलने का फैसला सही रहेगा या नहीं। पच्चीस साल की सृष्टि के लिए लॉकडाउन वरदान बनकर आया है, क्योंकि उस निजी स्कूल ने उसे अब स्थायी कर दिया है, जिसके प्रशासनिक विभाग में वह काम करती है। स्थायी नौकरी का मतलब है कि अब वह वेतनभोगी कर्मचारी है, लिहाजा उसे टैक्स बचाने के विकल्पों पर विचार करना है।
एनपीएस एक स्वैच्छिक रिटायरमेंट स्कीम है, जिसमें वृद्धावस्था पेंशन के लिए बचत की जा सकती है या रिटायरमेंट के बाद उपयोग करने के लिए एक फंड बनाया जा सकता है। 1 जनवरी, 2004 को यह योजना सिर्फ सरकारी कर्मचारियों के लिए लांच की गई थी, पर 1 जनवरी, 2009 से यह योजना देश के सभी नागरिकों के लिए लागू कर दी गई। एनपीए को पीएफआरडीए (पेंशन फंड रेगुलेटरी ऐंड डेवलेपमेंट अथॉरिटी) विनियंत्रित करता है। यह योजना 18 से 65 साल के तक के सभी लोगों के लिए है।
अधिकतम 60 साल की उम्र तक एनपीएस खाता खोला जा सकता है और 70 की उम्र तक इसमें निवेश किया जा सकता है। ढांचागत रूप से एनपीएस के तहत दो अलग-अलग खाते होते हैं-टायर 1 और टायर 2। टायर 1 खाते से 60 साल की उम्र तक पैसा नहीं निकाला जा सकता। हालांकि कुछ खास स्थितियों, जैसे-गंभीर बीमारी, बच्चों की शिक्षा, बच्चों की शादी, घर खरीदने या बनाने के लिए इससे आंशिक निकासी की जा सकती है। एनपीएस का ढांचा इस तरह तैयार किया गया है कि इसमें अधिकतम लॉक इन है, ताकि इस राशि का इस्तेमाल रिटायरमेंट के बाद किया जा सके।