किराये या लीज पर घर लेने वालों के लिए जुलाई से अतिरिक्त बोझ पड़ने वाला है। वस्तु व सेवाकर (जीएसटी) के तहत जमीन, मकान को लीज या किराये पर देने पर मकान मालिक को टैक्स देना होगा।
इससे किराया महंगा हो जाएगा, क्योंकि मकान मालिक इसकी भरपाई किरायेदार से ही करेगा। इसके अतिरिक्त बन रहे मकान पर ईएमआई देने पर भी हर महीने टैक्स देना होगा।
मकान, जमीन को खरीदना, बेचना रहेगा दायरे से बाहर
हालांकि जीएसटी के दायरे में मकान, जमीन को खरीदने या फिर बेचने पर किसी तरह का कोई टैक्स नहीं देना होगा। इसके लिए अभी मौजूद प्रावधानों के अनुसार केवल स्टांप ड्यूटी देनी होगी।
वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा पेश किए गए जीएसटी बिल में इस तरह का प्रावधान किया गया है। हालांकि बिजली के बिल को जीएसटी के प्रावधानों से बाहर रखा गया है।
1 जुलाई से लागू होगा जीएसटी
केंद्र सरकार 1 जुलाई से पूरे देश में जीएसटी लागू करने जा रही है। इसके लागू हो जाने के बाद से एक्साइज, सर्विस टैक्स और वैट खत्म हो जाएंगे।सरकार ने लोकसभा में जीएसटी से संबंधित एक बिल में इस तरह का प्रावधान किया गया है कि किराये, लीज और लाइसेंस के जरिए जमीन लेने पर इसको सप्लाई ऑफ सर्विस माना जाएगा।
इन पर भी लागू होगा किराये पर टैक्स
अगर कोई व्यक्ति अपने घर, बिल्डिंग, दुकान या फिर फैक्ट्री को व्यवसायिक गतिविधियों के लिए भी किराये पर देता है तो उस पर टैक्स देना होगा। खाली जमीन को बेचने खरीदने पर टैक्स नहीं लगेगा, लेकिन अगर उस जमीन पर किसी तरह का कंस्ट्रक्शन होता है, तो फिर इस पर टैक्स लगाने का प्रावधान किया गया है। पहले केवल कमर्शिलय प्रॉपर्टी को किराये पर देने पर टैक्स लगता था, लेकिन अब जीएसटी बिल में इसके लिए प्रावधान किया गया है।