अब किसी भी स्थिति में आपके सामान्य भविष्य निधि यानी पीपीएफ खाते से जुड़ी रकम कुर्क नहीं हो सकेगी। इसके अलावा अब संयुक्त पीपीएफ खाता भी नहीं खोला जा सकेगा। केंद्र सरकार ने पीपीएफ से जुड़े ऐसे ही कई नियमों में बदलाव किया है।
पीपीएफ अकाउंट खुलने के बाद पांच साल तक इस खाते से पैसा नहीं निकाला जा सकता। ये अवधि पूरा होने के बाद फॉर्म दो भर कर पैसा निकाला जा सकेगा। हालांकि पीपीएफ खाते में चौथे साल तक जमा पैसे की तुलना में 50 फीसदी से ज्यादा धनराशि नहीं निकाली जा सकेगी। पीपीएफ खाते की परिपक्ववता अवधि 15 साल पूरा होने के बाद इसे 5-5 साल की अवधि के लिए बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए परिपक्वता पूरा होने के एक साल पहले ही बढ़ाना होगा।
कोई भी व्यक्ति प्रपत्र-1 के जरिए आवदेन देकर एक खाता खोल सकता है। कोई व्यक्ति उस नाबालिग या मानसिक विक्षिप्त के नाम पर पीपीएफ खाता खुलवा सकता है, जिसका वह पालक हो। इस स्थिति में एक व्यक्ति के नाम पर एक ही खाता खुलवाया जा सकता है। पीपीएफ में संयुक्त खाता नहीं खुलवाया जा सकता है।
एक वित्त वर्ष के दौरान इस खाते में आप कम से कम 500 रुपये और अधिकतम 1.5 लाख रुपये जमा कर सकते हैं। यदि किसी व्यक्ति का अपना पीपीएफ खाता है और उसने नाबालिग की ओर से भी पीपीएफ खाता खोला है, तो उस स्थिति में भी दोनों खातों की कुल जमा सीमा सालाना 1.5 लाख रुपये ही रहेगी।
अगर किसी व्यक्ति ने यह खाता खोलने के पहले साल कम से कम 500 रुपए जमा किए और फिर उसके बाद अगले साल अगर कोई रकम नहीं जमा की तो इस खाते को बंद यानी डिस्कॉन्टिन्यूड खाता माना जाएगा। बंद खाते को फिर शुरू करने के लिए 50 रुपये पेनल्टी और हर साल के लिए न्यूनतम रकम यानी 500 रुपये के आधार पर एरियर जमा करना होगा। अगर किसी बंद खाते में कुछ पैसे पहले से हैं और इसे परिपक्वता से पहले रिवाइव नहीं किया गया है तो इसके बावजूद पुरानी रकम पर ब्याज मिलता रहेगा।
अगर किसी व्यक्ति का पीपीएफ खाता निष्क्रिय है तो वह नया पीपीएफ खाता नहीं खोल सकता है। इसके लिए उन्हें पुराने खाते को बंद करना होगा। कोई भी व्यक्ति किसी पोस्ट ऑफिस या बैंक में अपने नाम पर यह खाता खोल सकता है। इसके अलावा नाबालिग की तरफ से किसी और व्यक्ति द्वारा भी से खाता खोला जा सकता है।