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Cryptocurrency Future In India: फायदे का सौदा बन सकती है क्रिप्टोकरेंसी, भारत में इसका भविष्य सुनहरा

Tue, 16 Nov 2021 06:50 PM IST
दीपक चतुर्वेदी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Cryptocurrency Future In India: भारत में भी इसके प्रति अच्छा रुझान है, यही कारण है कि केंद्र सरकार भी इसे रेगुलेट करने के लिए विचार-विमर्श कर रही है। विशेषज्ञों की मानें तो यह जुआ नहीं बल्कि निवेश की दृष्टि से फायदे का सौदा है। उन्होंने कहा कि क्रिप्टो का भारत में भविष्य सुनहरा होगा। 
 
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क्रिप्टोकरेंसी - फोटो : pixabay
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विस्तार
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दुनियाभर में क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। अच्छे रिटर्न की चाह में निवशेक इस ओर आकर्षित हो रहे हैं। भारत में भी इसके प्रति अच्छा रुझान है, यही कारण है कि केंद्र सरकार भी इसे रेगुलेट करने के लिए विचार-विमर्श कर रही है। कई लोग इससे मिलने वाले बड़े रिटर्न को मुद्दा बनाते हुए इसे एक तरह का जुआ करार दे रहे हैं। लेकिन, विशेषज्ञों की मानें तो यह जुआ नहीं बल्कि निवेश की दृष्टि से फायदे का सौदा है। उन्होंने कहा कि क्रिप्टो का भारत में भविष्य सुनहरा होगा। 

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स्टॉक मार्केट की तरह ही क्रिप्टो बाजार
विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह से लोग शेयर बाजार में पैसा लगाते हैं, क्रिप्टाकरेंसी के बाजार का भी तरीका ऐसा ही है। इसे भी एक प्रकार से शेयर बाजार की तरह ही देखा जा सकता है। ये आपका नजरिया है कि आप अच्छा रिटर्न देने वाली क्रिप्टोकरेंसी को जुआ की तरह देखते हैं या फिर शेयर बाजार की तरह। हालांकि इसमें शेयर बाजार की तरह कोई मध्यस्थ नहीं होता है। 



क्रिप्टो में निवेश करते समय सावधानी जरूरी 
इस संबंध में चर्चा करते हुए क्रिप्टो विशेषज्ञों ने कहा कि हर क्रिप्टो क्वाइन के पीछे एक व्हाइट पेपर होता है। हालांकि, सभी इसके नाम और इससे मिलने वाले बड़े रिटर्न को देखकर ही इसमें निवेश करते हैं। क्रिप्टोकरेंसी में एकदम से आने वाली बढ़ोतरी ने लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया है। मगर इसमें निवेश के दौरान सावधानी से निर्णय लेना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस दिशा में सावधानी से कदम बढ़ाया जाए, तो यह एक निवेश का अच्छा जरिया बन सकता है। 
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निवेशकों की सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा 
भारत में क्रिप्टो निवेशकों की अच्छी खासी तादाद है और यह लगातार आगे बढ़ रही है। यही वजह है कि सरकार भी इसे लेकर नियामक लाने का मन बना रही है। हालांकि, नियामक को लेकर अभी कोई फैसला नहीं किया जा सका है। लेकिन ऐसी संभावना है कि सरकार शीतकालीन सत्र में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर नियामक ला सकती है। इससे जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि क्रिप्टो इंडस्ट्री भी हमेशा से निवेशकों की सुरक्षा को लेकर सजग रही है। इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली और पीयूष गोयल के सामने नियामक लाने की मांग रखी है और अभी भी यह मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आम जनता के निवेश को लेकर सुरक्षात्मक उपाय करना निश्चित तौर पर बेहद जरूरी है। हम ऐसे हर कदम का हम स्वागत करते हैं। 

नियामक से निवेशकों का डर खत्म होगा
सरकार की हमेशा से सोच रही है कि निवेशकों का पैसा सुरक्षित रहे। नियामक न होने की वजह से क्रिप्टो में निवेश करते हुए लोगों में डर बना रहता है। ऐसे में सरकार यह सोच रही है कि इसे रेगुलेट करने से इस तरह का डर खत्म हो जाएगा। जागरुकता बढ़ने से भारत में इसके भविष्य को गति मिलेगी। नियामक आने पर निवेशक अच्छे से इससे जुड़ पाएंगे। विशेषज्ञों ने कहा कि लोग निवेश करने का मन बना चुके हैं, सिर्फ इसके रेगुलेट होने का इंतजार कर रहे हैं। 

भारत में रोक लगने की संभावना नहीं 
चीन में क्रिप्टोकरेंसी पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की बात पर विशेषज्ञों ने कहा कि चीन की पॉलिसी नॉन लिबरेशन की तरफ रही है, ऐसा भारत में नहीं है। चीन ने अपनी खुद की क्रिप्टोकरेंसी लाने के मकसद से ग्लोबल करेंसी पर बैन लगाया है। भारत क्रिप्टोकरेंसी को बैन करने जैसा चीन की तरह कोई भी कदम उठाने नहीं जा रहा है। अभी जो चर्चाएं और विचार-विमर्श क्रिप्टो को लेकर चल रहा है, उसमें इस पर रोक की बात नहीं सामने आई है। भले ही आरबीआई इसे एक बड़ा खतरा बता रहा हो। इसलिए क्रिप्टो के भविष्य को लेकर हमें चीन से तुलना करने की बजाय अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से इसकीत तुलना करना चाहिए। 

भारत में तीन तरह की परेशानियां 
भारत में क्रिप्टोकरेंसी के भविष्य पर चर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि हर व्यक्ति जो निवेशक होता है वो तकनीक के बारे में नहीं सोचता। वो महज इस बात को देखता है कि इसमें एक रुपया लगाउंगा तो एक लाख कमाउंगा। लेकिन यह धारणा निवेशकों के लिए परेशानी खड़ी करने वाली है। विशेषज्ञों की राय है कि क्रिप्टो में निवेश करते समय इसमें आने वाली बड़ी गिरवाट के लिए तैयार रहना होगा। दूसरी परेशानी कस्टडी की है। क्रिप्टो बाजार में भी सारी ट्रेडिंग शेयर बाजार जैसे ही होती है, लेकिन कस्टडी को लेकर सवाल खड़ा होता रहता है। तीसरी परेशानी के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत में निवेशकों को नई चीज में छोटा निवेश करने की धारणा रहती है। लेकिन इस तरह की करेंसी के जल्द गायब होने की संभावना बनी रहती है। या दूसरे शब्दों में कहें तो कम निवेश के साथ बड़ा मुनाफा देखने वालों बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। 

फूंक-फूंककर कदम रखना जरूरी
बिटक्वाइन की ज्यादातर सप्लाई कुछ लोगों तक सीमित है। पूरा बाजार डिमांड और सप्लाई के आधार पर चलता है। ऐसे में हमेशा एक ब्रांडेड कंपनी के क्रिप्टोक्वाइन में निवेश करना चाहिए। यहां बड़ी भीड़ आ गई है कई छोटे प्लेटफॉर्म भी मौजूद हैं, जो कब गायब हो जाएं कोई पता नहीं। हाल ही में बड़ा रिटर्न देने वाली ऐसी कई करेंसी देखने को मिली हैं, जो रातोंरात चमकीं और कुछ ही घंटों में निवेशकों को कंगाल बनाकर गायब हो गईं। इसलिए उसी क्रिप्टो में निवेश करना फायदेमंद है जिसका डेटा ऑनलाइन मौजूद है और जिनकी बैंलेंसशीट ऑनलाइन है। 

भारत में क्रिप्टो में निवेश को बनाना होगा सरल 
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका की तरह ही भारत में विटक्वाइन का भविष्य सुनहरा है। यह ऐसा एसेट है जो कुछ सालों में बड़े पैमाने पर दिखेगा। भारत के पास ये मौका है कि क्रिप्टो को लेकर जागरूक हों और इसकी तकनीक को समझें तो निश्चित तौर पर भारत में इससे निवेशकों को फायदा मिलेगा। निवेशकों के लिए क्रिप्टो में निवेश की प्रक्रिया को भारत में सरल बनाना बेहद जरूरी है। क्रिप्टो में जो निवेश कर रहे हैं वो सिर्फ अमीर नहीं है। छोटे निवेशक भी इससे जुड़ रहे हैं। 

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