सहारा समूह एक और नई परेशानी में फंसता दिख रहा है। नई परेशानी प्रतिभूतियों (सिक्यूरिटीज) को बेचकर जुटाए गए पैसों को निवेशकों को रिफंड करने को लेकर है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह अदालती आदेश के खिलाफ है। कोर्ट ने सहारा समूह से पूछा कि आखिर वह ऐसा क्यों कर सकती है। कोर्ट के निर्देश पर अब रिजर्ब बैंक ऑफ इंडिया पूरे मामले की जांच करेगा।
आरबीआई ने मंगलवार को न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष दावा किया कि सहारा इंडिया फाइनेंशियल कॉरपोरेशन लिमिटेड (एसआईएफसीएल) ने कुछ प्रतिभूतियों की बिक्री कर पार्टनरशिप कंपनी सहारा इंडिया को 484.67 करोड़ रुपये लोन दिया। सहारा इंडिया ने ये पैसे निवेशकों को वापस किए, जबकि इसका ट्रांसफर सहारा-सेबी रिफंड अकाउंट में किया जाना था।
क्यों बेचीं प्रतिभूतियां
इस पर पीठ ने सहारा समूह की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एस गणेश से पूछा कि ऐसा कैसे किया जा सकता है, जबकि गत वर्ष चार जून के आदेश में समूह को बांड और प्रतिभूति की बिक्री से जुटाए पैसे सहारा-सेबी रिफंड अकाउंट में जमा करने का निर्देश दिया गया था।
पीठ ने पूछा कि आपने प्रतिभूतियां क्यों बेचीं? आपको आरबीआई के पास जाना चाहिए था। पीठ ने सहारा से कहा कि आपकी परेशानी बढ़ती जा रही है।
पीठ ने आरबीआई को निर्देश दिया है कि वह नियम-कानून के हिसाब से अपना निर्णय लें। हालांकि, पीठ ने आरबीआई से कहा कि वह सहारा का पक्ष लेने के बाद फैसला लें।
आरबीआई अगर सहारा समूह पर पेनाल्टी लगाना चाहता है तो वह ऐसा कर सकता है। साथ ही शीर्ष अदालत ने सहारा समूह को हलफनामे के जरिए यह बताने के लिए कहा कि निवेशकों को पैसे चेक से दिए गए हैं या नकद। इसका पूरा ब्योरा पेश करने के लिए कहा गया है।
फिर से मिलेगी पुरानी व्यवस्था
वहीं वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने सुब्रत राय सहारा और समूह के दो निदेशकों को जेल के भीतर संपत्तियों की बिक्री के लिए खरीदार की संभावना तलाशने के लिए पूर्व में दी जा रही व्यवस्था फिर से देने की गुहार की।
उन्होंने कहा कि कम से कम दो हफ्ते के लिए यह व्यवस्था फिर से दी जाए। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने सेबी को नोटिस जारी किया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह से कहा कि वह पहले वह सेबी और अमाइकस क्यूरी को यह बताए कि खरीदार से बातचीत किस चरण में है।
इसके बाद इस पर विचार किया जाएगा। अगली सुनवाई 13 मार्च को होगी। मालूम हो कि सहारा प्रमुख और उसके दो निदेशक करीब 11 महीने से जेल में बंद हैं। सुप्रीम कोर्ट ने जमानत के लिए 5000 करोड़ रुपये और इतनी ही राशि की बैंक गारंटी देने के लिए कहा है।