एशिया-प्रशांत (एपीएसी) क्षेत्र में कार्यालय स्थापित करने के लिए गुरुग्राम आईटी कंपनियों का पांचवां सबसे पसंदीदा शहर बन गया है। शीर्ष पांच शहरों में इसके अलावा बीजिंग, बंगलूरू, शंघाई और सिंगापुर भी शामिल हैं। बेहतर कारोबारी परिस्थतियों के अलावा इंजीनियरों की उपलब्धता और रियल एस्टेट की वृद्धि के कारण ये शहर आईटी कंपनियों की पसंद बने हुए हैं।
संपत्ति सलाहकार सीबीआरई की रिपोर्ट ‘प्रोग्रामिंग एशिया पेसेफिक्स टेक सिटीज एज ग्लोबल टेक हब्स’ में कहा गया है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में कार्यालय स्थल की मांग में आईटी कंपनियों का अहम योगदान है, जबकि क्षेत्र में सिलिकॉन वैली जैसा कोई बड़ा शहर या हब नहीं है।
2018 में कार्यालय स्थापित करने के लिए किराये पर लिए गए कुल जगहों में आईटी क्षेत्र की हिस्सेदारी 23 फीसदी रही थी। सीबीआरई के अध्ययन में कारोबारी परिस्थितियों, नवोन्मेषी वातावरण, लागत एवं उपलब्धता के आधार पर एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 15 शहरों को रैंकिंग दी गई है।
नवोन्मेषी वातावरण को ज्यादा तव्वजो
रिपोर्ट में कहा गया है कि कारोबार करने की परिस्थितियों और नवोन्मेषी माहौल के मामले में इन पांच शहरों की स्थिति काफी अच्छी है। कंपनियों ने लागत (20 फीसदी वेटेज) के बदले कारोबारी परिस्थितियों और नवोन्मेषी वातावरण को (40 फीसदी वेटेज) को ज्यादा तव्वजो दी। ये शहर एशिया-प्रशांत में परिचालन का आधार स्थापित करने की मांग करने वाली पारंपरिक और नई तकनीक कंपनियों की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए पसंदीदा स्थान हैं।
लगातार बढ़ रहीं आईटी कंपनियां
सीबीआरई इंडिया के चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अंशुमन मैगजीन का कहना है कि भारत में आईटी कंपनियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। भारत लगातार ऐसे क्षेत्र के रूप में आगे बढ़ रहा है, जहां बदलती प्रौद्योगिकी तकनीक को तेजी से अपनाया जा रहा है। हालांकि, अब भी उन स्थानों की पहचान करना बाकी है, जो व्यापार की स्थिति, नमोन्मेष और प्रतिभा के साथ वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी डिजिटल हब बन सकते हैं।
सबसे ज्यादा स्नातक भारत में
सीबीआरई की रिपोर्ट में कहा गया है कि हांगझोऊ, शेन्झेन, टोक्यो और सियोल के साथ हैदराबाद पांच सक्षम शहरों की सूची में शामिल हैं, जहां आईटी कंपनियां अपने पांव मजबूत करना चाहती हैं। ये शहर पहले से ही तकनीकी उद्योग उप-क्षेत्रों की मेजबानी करते हैं और अधिकांश श्रेणियों में बेहतर प्रदर्शन करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में 84 लाख विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) स्नातक हैं। इनमें से 30 फीसदी अकेले भारत में हैं, जो एक बहुत बड़ी संख्या है।