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WPI Inflation: थोक महंगाई दर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची, मई में 15.88 फीसदी की दर से बढ़ी

Tue, 14 Jun 2022 12:53 PM IST
दीपक चतुर्वेदी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

WPI Inflation Hit New High In May: थोक महंगाई ने फिर बड़ा झटका दिया है। मई महीने में थोक मुद्रास्फीति दर ने फिर से 15 फीसदी के ऊपर का स्तर कायम रखा है और यह 15.88 फीसदी पर पहुंच गई। गौरतलब है कि अप्रैल महीने में यह 15.08 फीसदी पर रही थी।
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थोक महंगाई - फोटो : FILE PHOTO
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एक ओर जहां खुदरा महंगाई के मोर्चे पर देश की जनता को राहत मिली है, तो वहीं थोक महंगाई ने फिर बड़ा झटका दिया है। मई महीने में थोक मुद्रास्फीति दर ने फिर से 15 फीसदी के ऊपर का स्तर कायम रखा है और यह 15.88 फीसदी पर पहुंच गई। गौरतलब है कि अप्रैल महीने में यह 15.08 फीसदी पर रही थी।

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लगातार 14वें महीने दोहरे अंकों में 
थोक महंगाई के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने में सबसे बड़ा हाथ खाद्य से लेकर जिंसों तक की कीमतों में बढ़ोतरी का है। यहां बता दें कि इससे पिछले साल की समान अवधि में थोक महंगाई दर 13.11 फीसदी पर थी। गौर करने वाली बात यह है कि थोक मुद्रास्फीति पिछले साल अप्रैल से लगातार 14वें महीने दोहरे अंकों में बनी हुई है। थोक महंगाई का यह नया उच्च स्तर बीते नौ साल में सबसे अधिक है। वहीं पुराने आंकड़ों को देखें तो अप्रैल में मुद्रास्फीति का जो डाटा सामने आया था, वह बीते 30 सालों में अप्रैल महीने के दौरान सर्वाधिक है। 

खुदरा महंगाई में आई इतनी गिरावट
बताया जा रहा है कि खाने का सामान सस्ता होने से खुदरा मुद्रास्फीति मई महीने में घटकर 7.04 फीसदी पर आ गई। हालांकि, यह पिछले लगातार पांच माह से भारतीय रिजर्व बैंक के संतोषजनक स्तर से ऊपर बनी हुई है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित (सीपीआई) मुद्रास्फीति 7.79 फीसदी पर थी। पिछले साल मई में खुदरा मुद्रास्फीति 6.3 फीसदी थी।
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आठ फीसदी के पार पहुंचेगी खुदरा महंगाई
मई 2022 में हेडलाइन सीपीआई मुद्रास्फीति भले ही कम होकर सात फीसदी के स्तर तक पहुंच गई हो, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि मुद्रास्फीति अभी चरम पर नहीं है और आने वाले समय में इसमें तेज वृद्धि देखने को मिलेगी। रिसर्च फर्म नोमुरा ने रिपोर्ट जारी करते हुए कहा है कि आने वाले महीनों में हेडलाइन मुद्रास्फीति के आठ फीसदी के स्तर को पार करने की संभावना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर जिंसों की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं, जबकि उपभोक्ताओं पर लागत का बोझ बढ़ रहा है। इसमें कहा गया कि केंद्र सरकार ने बढ़ती महंगाई को शांत करने के लिए पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में कटौती की घोषणा की थी, जिसके कारण ताजा आंकड़ों में कुछ कमी देखी गई।
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