विश्व बैंक ने सोमवार को बताया है कि अगर इस्राइल और हमास के बीच युद्ध तेज होता है, तो तेल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हो सकती है, इसके परिणामस्वरूप दुनिया भर में खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं। विश्व बैंक के कमोडिटी मार्केट आउटलुक में पाया गया कि यदि संघर्ष नहीं बढ़ता है तो तेल की कीमतों पर प्रभाव सीमित होना चाहिए, लेकिन यदि संघर्ष बढ़ता है तो हालात बिगड़ जाएंगे।
विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में छोटे, मध्यम या बड़े व्यवधान की स्थिति में वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए तीन परिदृश्यों की बात कही है। विश्व बैंक का अनुमान है कि यदि संघर्ष "छोटे व्यवधान" परिदृश्य से नहीं बढ़ता है तो प्रभाव सीमित होना चाहिए- ऐसे में तेल की कीमतें अगले साल औसतन 81 डॉलर प्रति बैरल तक गिरने की उम्मीद है।
लेकिन युद्ध के कारण अगर "मध्यम व्यवधान" पैदा होता है जैसा इराक युद्ध के दौरान हुआ था तो वैश्विक तेल आपूर्ति प्रति दिन 3 मिलियन से 5 मिलियन बैरल तक घट जाएगी, जिससे तेल की कीमतें संभवतः 35% तक बढ़ जाएंगी।
विश्व बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री इंदरमित गिल ने कहा कि यूक्रेन पर रूस के आक्रमण का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पहले ही विघटनकारी प्रभाव पड़ा है जो आज भी जारी है। गिल ने कहा, "अगर संघर्ष बढ़ता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को दशकों में पहली बार दोहरी ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ेगा- इसका कारण ना केवल यूक्रेन युद्ध होगा बल्कि पश्चिम एशिया की स्थिति भी इसके लिए जिम्मेदार होगी।
विश्व बैंक के उप मुख्य अर्थशास्त्री अहान कोसे ने कहा कि तेल की ऊंची कीमतों से खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ेंगी। कोसे ने कहा, "अगर तेल की कीमतें गंभीर स्तर तक पहुंचती हैं तो इससे खाद्य मूल्य मुद्रास्फीति बढ़ेगी जो रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के परिणामस्वरूप कई विकासशील देशों में पहले से ही बढ़ी हुई है। नए संघर्ष में इजाफा ना केवल क्षेत्र के भीतर बल्कि दुनिया भर में खाद्य असुरक्षा को बढाएगा।
कुल मिलाकर, संघर्ष की शुरुआत के बाद से तेल की कीमतें लगभग 6% तक बढ़ गई हैं। सोना जिसकी कीमतें संघर्ष की स्थिति में बढ़ती है विश्व बैंक के अनुसार लगभग 8% तक उछल चुका है। कुछ विश्लेषकों को संदेह है कि अमेरिका बड़े पैमाने पर तेल की कमी का अनुभव कर सकता है क्योंकि अमेरिकी तेल उत्पादन अब तक के उच्चतम स्तर पर है। ब्लूमबर्ग के एक कार्यक्रम में वित्त मंत्री जेनेट येलेन ने गुरुवार को कहा कि बाइडन प्रशासन हमास के खिलाफ इस्राइल के युद्ध के आर्थिक परिणामों की सावधानीपूर्वक निगरानी कर रहा है।
उन्होंने कहा "अब तक, इस लड़ाई के बहुत अधिक वैश्विक परिणाम सामने नहीं आए हैंलेकिन अगर युद्ध फैलता है निश्चित रूप से चुनौती बढ़ सकती है।" अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के कार्यकारी निदेशक फतिह बिरोल ने कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष और गाजा में इस्राइल और हमास के बीच नवीनतम हिंसा के बीच, "कोई भी मुझे यह विश्वास नहीं दिला सकता है कि तेल और गैस देशों या उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षित ऊर्जा विकल्प हैं।"