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Fuel Export : सरकार ने घरेलू कच्चे तेल पर अप्रत्याशित लाभ कर में की बढ़ोतरी, डीजल के निर्यात शुल्क में कटौती

Thu, 17 Nov 2022 04:00 AM IST
देव कश्यप पीटीआई, नई दिल्ली।

सार

अप्रत्याशित लाभ कर की हर 15 दिन में की जाने वाली समीक्षा में सरकार ने डीजल के निर्यात पर शुल्क को 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 10.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया। डीजल पर लगने वाले शुल्क में 1.50 रुपये प्रति लीटर रोड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस शामिल है। वहीं, जेट ईंधन या एटीएफ पर निर्यात शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
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घरेलू स्तर पर उत्पादित कच्चे तेल पर अप्रत्याशित लाभ कर बढ़ा। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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केंद्र सरकार ने बुधवार को डीजल के निर्यात पर शुल्क में कटौती का एलान किया जबकि घरेलू स्तर पर उत्पादित कच्चे तेल पर अप्रत्याशित लाभ कर (Windfall Profit Tax) बढ़ा दिया। आज यानी 17 नवंबर से से नई दरें लागू होंगी। सरकारी स्वामित्व वाली तेल और प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) जैसी फर्मों द्वारा उत्पादित कच्चे तेल पर अप्रत्याशित कर 17 नवंबर से 9,500 रुपये प्रति टन से बढ़ाकर 10,200 रुपये प्रति टन कर दिया गया है। एक सरकारी अधिसूचना में यह जानकारी दी गई है।

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एटीएफ पर निर्यात कर में कोई बदलाव नहीं
अप्रत्याशित लाभ कर की हर 15 दिन में की जाने वाली समीक्षा में सरकार ने डीजल के निर्यात पर शुल्क को 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 10.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया। डीजल पर लगने वाले शुल्क में 1.50 रुपये प्रति लीटर रोड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस शामिल है। जेट ईंधन या एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) पर निर्यात शुल्क, जो एक नवंबर को पिछली समीक्षा में पांच रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया था, उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है।

जब पहली बार निर्यात शुल्क लगाया गया था, तो डीजल और एटीएफ के साथ-साथ पेट्रोल के निर्यात पर भी अप्रत्याशित कर लगाया गया था। लेकिन बाद में पखवाड़े की समीक्षा के दौरान पेट्रोल पर से कर हटा दिया गया। जबकि अप्रत्याशित लाभ कर की गणना किसी भी कीमत को हटाकर की जाती है, जो उत्पादकों को एक सीमा से ऊपर मिल रही है। ईंधन के निर्यात पर लगने वाला कर मार्जिन पर आधारित होती है, जो तेल रिफाइनरी कंपनियां विदेशी शिपमेंट के जरिए कमाते हैं। ये मार्जिन मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमत और लागत का अंतर है।
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भारत ने पहली बार एक जुलाई को अप्रत्याशित लाभ कर लगाया, इसके साथ ही भारत उन देशों की बढ़ती संख्या में शामिल हो गया जो ऊर्जा कंपनियों के अति सामान्य लाभों पर कर लगाते हैं। उस समय पेट्रोल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर छह रुपये प्रति लीटर (12 डॉलर प्रति बैरल) और डीजल पर 13 रुपये प्रति लीटर (26 डॉलर प्रति बैरल) का निर्यात शुल्क लगाया जाता था। साथ ही घरेलू कच्चे तेल के उत्पादन पर 23,250 रुपये प्रति टन (40 डॉलर प्रति बैरल) अप्रत्याशित लाभ कर भी लगाया गया था। पिछले दौर में 20 जुलाई, दो अगस्त, 19 अगस्त, एक सितंबर, 16 सितंबर, एक अक्तूबर, 16 अक्तूबर और एक नवंबर को शुल्क को आंशिक रूप से समायोजित किया गया था।

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