ट्राई ने कहा कि नए नियामकीय ढांचे का मकसद टीवी दर्शकों को पसंद के चैनल चुनने का अधिकार देना था। इसके जरिये दर्शक अपने मासिक बिल को नियंत्रित कर सकते थे, लेकिन ब्रॉडकास्टर और डिस्ट्रीब्यूशन ऑपरेटर नियमों के खिलाफ जाकर नए-नए ऑफर ला रहे हैं।
नए नियमों में उन्हें चैनल का बुके पेश करने की छूट मिली है, जिसका फायदा उठा रहे हैं। चूंकि, नए नियमों में इस पर लगाम लगाने का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में टीवी दर्शकों के हित में ट्राई इन ऑफर्स पर लगाम कसने की तैयारी कर रहा है।
ट्राई ने परामर्श पत्र में कहा है कि अधिकतर सेवा प्रदाता कंपनियां और ऑपरेटर्स की ओर से उपभोक्ताओं को चैनल के बुके पर 70 फीसदी तक डिस्काउंट दिया जा रहा है। ज्यादातर बुके में थोड़े फेरबदल के साथ एक जैसे चैनल ही शामिल हैं। इससे ग्राहकों को टीवी चैनल्स की वास्तविक कीमतों का पता नहीं चल पाता है।
उदाहरण के तौर स्टार इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने एसवीपी हिन्दी बुके में 15 चैनल दिए हैं, जिनकी एक माह की कीमत 75.10 रुपये है। ऑफर के तहत 34.8 फीसदी छूट के साथ यह 49 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसमें टैक्स अलग से है।