श्रीलंका के केंद्रीय बैंक के गवर्नर ने देश को आईएमएफ से मिले बेलआउट पैकेज पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। श्रीलंका के केंद्रीय बैंक के गवर्नर नंदलाल वीरसिंघम ने कहा है कि संकट से उबरने के लिए श्रीलंका के पास अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के 2.9 अरब डॉलर के बेलआउट कार्यक्रम पर निर्भर रहने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने इस महीने की शुरुआत में श्रीलंका को 33.7 करोड़ डॉलर की दूसरी किस्त जारी करने को मंजूरी दी थी।
वीरसिंघे इन सवालों का जवाब दे रहे थे कि क्या द्वीपीय देश आईएमएफ के 2.9 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज के लिए शर्तों में बदलाव के लिए फिर से बातचीत करेगा?
उन्होंने कहा, "कोई विकल्प नहीं है। तथ्य यह है कि हमने जिन विकल्पों का इस्तेमाल किया उसके कारण हम दिवालियापन की स्थिति में हैं।" इससे पहले राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने सुधारों को लेकर विपक्ष की कड़ी आलोचना का जवाब देते हुए कहा था कि नकदी संकट से जूझ रहे इस द्वीपीय देश के लिए आर्थिक दिवालियापन से बाहर निकलने के लिए आईएमएफ कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है।
मुख्य विपक्षी दल समगी जन बालवेगया (एसजेबी) ने आईएमएफ के बेलआउट पैकेज पर फिर से बातचीत करने का संकल्प लेते हुए दावा किया है कि इससे जुड़ी जिन शर्तों पर राष्ट्रपति सहमत हुए थे, उससे लोगों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है।
वित्त मंत्री के रूप में, विक्रमसिंघे आईएमएफ वार्ताओं में अग्रणी थे और उन्होंने व्यक्तिगत करों में वृद्धि और उच्च उपयोगिता टैरिफ जैसे कठिन आर्थिक सुधारों की शुरुआत की। इसके अलावा, जनवरी 2024 से देश में एक उच्च मूल्य वर्धित कर नेट लागू हो रहा है, जिसमें ईंधन जैसी वस्तुओं को भी शामिल किया गया है, जो पहले वैट-मुक्त थे।
विक्रमसिंघे जोर देकर कहते हैं कि आईएमएफ बेलआउट लाने का उनका तरीका दीर्घकालिक राहत लाने का एकमात्र तरीका था, हालांकि इससे अल्पकालिक कठिनाइयां बढ़ेंगी।
विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) द्वारा आईएमएफ समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद से द्वीप की अर्थव्यवस्था को मिले समर्थन के बारे में वीरसिंघे ने कहा कि संकट को हल करने के लिए और अंतरराष्ट्रीय समर्थन प्राप्त करने के लिए आईएमएफ कार्यक्रम को बनाए रखना जरूरी था। बता दें कि 2022 में इतिहास के सबसे खराब आर्थिक संकट से प्रभावित देश का विदेशी मुद्रा भंडार एक महत्वपूर्ण निचले स्तर पर गिर गया था।