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ORF Report: 2028 तक सेवा क्षेत्र में होगा सबसे अधिक रोजगार का सृजन, ओआरएफ की रिपोर्ट में दावा

Tue, 16 Apr 2024 11:19 AM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ओआरएफ की रिपोर्ट में तेजी से विकास के लिए तैयार दस उच्च-अवसर वाले क्षेत्रों की पहचान की गई है। इनमें डिजिटल सेवाएं, वित्तीय सेवाएं, स्वास्थ्य सेवा, आतिथ्य, उपभोक्ता खुदरा, ई-कॉमर्स, नवीकरणीय ऊर्जा, वैश्विक क्षमता केंद्र और एमएसएमई और स्टार्टअप इकोसिस्टम शामिल हैं।
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ओआरएफ की रिपोर्ट - फोटो : Social Media
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विस्तार
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ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) ने रिपोर्ट 'इंडिया एम्प्लॉयमेंट आउटलुक 2030: नेविगेटिंग सेक्टोरल ट्रेंड्स एंड कॉम्पिटेंसी' में वर्ष 2028 तक कुल रोजगार में 22 प्रतिशत की वृद्धि और बेरोजगारी में 97 आधार अंकों की गिरावट का अनुमान लगाया गया है। 

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रिपोर्ट के अनुसार विशेष रूप से सेवा क्षेत्र में रोजगार सृजन में सबसे अधिक वृद्धि की उम्मीद है। सेवा उत्पादन में प्रत्येक इकाई वृद्धि के साथ रोजगार में 0.12 प्रतिशत की वृद्धि होती है। यह रिपोर्ट भारत भारतीय बाजार में नौकरियों के भविष्य पर प्रकाश डालती है और विशेष रूप से सेवा क्षेत्र की भूमिका पर जोर देती है जो रोजगार वृद्धि के मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
क्योंकि देश 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के करीब है।

रिपोर्ट में तेजी से विकास के लिए तैयार दस उच्च-अवसर वाले क्षेत्रों की पहचान की गई है। इनमें डिजिटल सेवाएं, वित्तीय सेवाएं, स्वास्थ्य सेवा, आतिथ्य, उपभोक्ता खुदरा, ई-कॉमर्स, नवीकरणीय ऊर्जा, वैश्विक क्षमता केंद्र और एमएसएमई और स्टार्टअप इकोसिस्टम शामिल हैं। इसके अलावा, रिपोर्ट तरीकों की भी चर्चा करती है जो सेवा क्षेत्र में महिलाओं के लिए रोजगार प्रदान करता है। 
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रिपोर्ट अवसरों को भुनाने और समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं के कौशल, वित्तीय समावेशन और उद्यमिता में निवेश को प्राथमिकता देने की वकालत करता है। रिपोर्ट के अनुसार मेक इन इंडिया जैसी पहलों तथा अमेरिका से आयात बढ़ने के बावजूद भारत के विनिर्माण क्षेत्र का परिदृश्य कम आशावादी नजर आ रहा है। इस क्षेत्र में रोजगार में गिरावट देखी गई है, जिसका श्रेय तकनीकी प्रगति और स्वचालन में वृद्धि को दिया जाता है। 

ओआरएफ के निदेशक और रिपोर्ट के लेखकों में से एक नीलांजन घोष ने रोजगार और कौशल अंतराल की पहचान करने के लिए अन्य हितधारकों के साथ मिलकर नीति निर्माताओं और सार्वजनिक क्षेत्र की योजनाओं के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने पाठ्यक्रम और कौशल को उन्नत करने की आवश्यकता पर जोर दिया ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि भारत का प्रतिभा पूल उद्योगों के लिए तैयार रहे।

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