देश में सेमीकंडक्टर की कमी को दूर करने के लिए केंद्र सरकार वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक चिप कंपनियों को आकर्षित करने की योजना बना रही है। इस योजना के तहत भारतीय सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) और स्टार्टअप को वित्तीय एवं बुनियादी ढांचा मदद देने की बात कही गई है।
सेमीकंडक्टर (चिप) की कमी को दूर करने के लिए सरकार जल्द प्रोत्साहन नीति लाएगी। एक आधिकारिक सूत्र ने बताया, इस संकट के बीच सरकार घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने व वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक चिप कंपनियों को आकर्षित करने के लिए सेमीकंडक्टर डिजाइन से जुड़ी नई प्रोत्साहन योजना लाने पर विचार कर रही है। योजना के तहत पांच साल में करीब 1,000 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव है।
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सूत्र के मुताबिक, इस योजना के तहत भारतीय सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) और स्टार्टअप को वित्तीय एवं बुनियादी ढांचा मदद देने की बात कही गई है। ये स्टार्टअप जब सेमीकंडक्टर का उत्पादन कर बाजार में बेचना शुरू करेंगे तो उन्हें अपने शुद्ध बिक्री कारोबार पर योजना के तहत अतिरिक्त प्रोत्साहन भी दिया जाएगा।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने पिछले सप्ताह कहा था कि सरकार भारतीय नीति के मसौदे पर चर्चा को नवंबर में सेमीकंडक्टर कंपनियों का सम्मेलन करेगी। आईईएसए चेयरमैन राजीव खुशु ने कहा, इस पहल से चिप डिजाइन क्षेत्र में भारत की ताकत बढ़ेगी।
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योजना की खास बातें
योजना के तहत पहले साल करीब 250 करोड़ और अगले चार साल में 750 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव है।
प्लांट लगाने में होने वाले खर्च का 50% तक इंसेंटिव मिल सकता है। एक कंपनी को अधिकतम 15 करोड़ रुपये मिल सकते हैं।
अगले पांच साल में 15 सेमीकंडक्टर डिजाइन विकसित करने का प्रस्ताव है।
100 सेमीकंडक्टर डिजाइन स्टार्टअप पर जोर रहेगा। करीब 20 का टर्नओवर 1,500 करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य।