ओडिशा के कोरापुट जिले में काला जीरा चावल के लिए जीआई टैग को लेकर विवाद ओडिशा के जयपोर में एमएस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन (एमएसएसआरएफ) ने कोरापुट के प्रसिद्ध 'काला जीरा चावल' को औपचारिक रूप से जीआई टैग देने के संबंध में भौगोलिक संकेतक (जीआई) अधिकारियों की ओर से जारी किए गए एक हालिया विज्ञापन पर आपत्ति जताई है। काला जीरा चावल को चावल के राजकुमार नाम से जाना जाता है।
एमएसएसआरएफ ने तर्क दिया कि जैविक श्री किसान उत्पादक कंपनी (जेएसएफपीसी) के रूप में पहचानी गई एक निजी कंपनी द्वारा जीआई टैग के लिए आवेदन संभावित रूप से स्थानीय किसानों को लाभ से बाहर कर सकता है। यह आरोप इस विश्वास पर आधारित है कि एक बार जीआई टैग दिए जाने के बाद, आवेदक कंपनी के पास काला जीरा चावल की खेती और विपणन करने का विशेष अधिकार होगा, जिससे जिले के अन्य किसानों की पहुंच नहीं होगी।
उन्होंने कहा, 'काला जीरा चावल कोरापुट जिले का एक विशेष उत्पाद है और जीआई टैग के लिए आवेदन सरकारी एजेंसी द्वारा किया जाना है, न कि किसी निजी संगठन द्वारा। एक बार जब किसी निजी संगठन को जीआई टैग मिल जाता है तो आवेदक कंपनी एकमात्र लाभार्थी होगी क्योंकि उसे इसकी खेती के अधिकार मिलेंगे, जिससे किस्म उगाने में शामिल किसानों को नुकसान होगा। उन्होंने कहा, "जल्द ही हम जीआई अधिकारियों के समक्ष आपत्ति दर्ज करेंगे, जो केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में काम करते हैं।"
जीआई अधिकारियों ने काला जीरा चावल जीआई टैग से संबंधित आपत्तियां जमा करने के लिए विज्ञापन के प्रकाशन की तारीख से तीन महीने का समय दिया है। परिदा के अनुसार, एमएसएसआरएफ ने जिले में काला जीरा चावल के संरक्षण और संवर्धन के लिए बड़े पैमाने पर काम किया है, लेकिन उसने जीआई टैग के लिए कभी आवेदन नहीं किया क्योंकि यह सरकार द्वारा यह सुनिश्चित करने के लिए किया जाना चाहिए कि पूरा किसान समुदाय इससे लाभान्वित हो।
परिदा ने आरोप लगाया, ''आवेदक ने जीआई टैग के लिए आवेदन करते समय काला जीरा चावल पर एमएसएसआरएफ के सार्वजनिक रूप से उपलब्ध शोध का हवाला दिया है।" जेएसएफपीसी के प्रतिनिधि प्रभाकर अधिकारी ने एमएसएसआरएफ का विरोध किया। उन्होंने कहा, "जेएसएफपीसी जिले के 7 ब्लॉकों के किसानों का एक संगठन है और इसके किसानों ने काला जीरा चावल के लिए जीआई टैग के लिए आवेदन किया है। अगर इसे मिलता है तो पूरे किसान समुदाय को फायदा होगा, किसी एक संगठन को नहीं।"