रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीतियों पर शुक्रवार को आए फैसलों में महंगाई का दबाव साफ देखा गया। गवर्नर शक्तिकांत दास ने भी माना कि विकास की राह में महंगाई सबसे बड़ा रोड़ा है। पेट्रोलियम और खाद्य उत्पादों की लगातार बढ़ती कीमतों के कारण आरबीआई को 2021-22 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान भी 0.60 फीसदी बढ़ाना पड़ा।
कर्ज पुनर्गठन पर छह महीने का और समय
आरबीआई ने संकट में चल रहीं कंपनियों को कर्ज पुनर्गठन का लाभ लेने के लिए छह महीने का समय और दिया है। पहले इन कंपनियों को 31 मार्च, 2022 तक आवश्यक परिचालन सीमा तक पहुंचना जरूरी था। अब यह समय छह महीने बढ़ाकर 1 अक्तूबर, 2022 कर दिया है।
विकास को प्राथमिकता
आरबीआई ने ब्याज दरें स्थिर रखकर महंगाई के ऊपर विकास को तरजीह दी है। एमपीसी के फैसलों से पता चलता है कि गवर्नर दास की मंशा महंगाई जैसे तात्कालिक झटकों से उबरते हुए ठोस व टिकाऊ विकास दर लक्ष्य पाने का है। -एसएस मल्लिकार्जुन राव, एमडी-सीईओ, पीएनबी