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इस्तीफा : कुमार मंगलम बिड़ला ने वोडाफोन आइडिया का चेयरमैन पद छोड़ा, कर्ज संकट में फंसी है कंपनी

Wed, 04 Aug 2021 07:52 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

देश के अग्रणी उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला ने वोडाफोन आइडिया के गैर कार्यकारी चेयरमैन व निदेशक का पद छोड़ दिया है। उनकी जगह हिमांशु कंपानिया को गैर कार्यकारी चेयरमैन बनाया गया है। 
 
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कुमार मंगलम बिड़ला - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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ख्यात उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला ने कर्ज के दलदल में फंसी वोडाफोन आइडिया के गैर कार्यकारी निदेशक व गैर कार्यकारी चेयरमैन के पद से इस्तीफा दे दिया। कंपनी के निदेशक मंडल ने उनका आग्रह मंजूर करते हुए इस्तीफा स्वीकार कर लिया। 

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इसके साथ ही वोडाफोन आइडिया के निदेशक मंडल ने टेलीकॉम क्षेत्र के पुरानी खिलाड़ी हिमांशु कपानिया को गैर कार्यकारी चेयरमैन चुना है। वोडाफोन आइडिया ने सेबी व स्टॉक एक्सचेंजोें को भेजी सूचना में कहा है कि वोडाफोन आइडिया के बोर्ड ने आज कुमार मंगलम बिड़ला का गैर कार्यकारी निदेशक व गैर कार्यकारी चेयरमैन पद से इस्तीफे का आग्रह मंजूर कर लिया। यह 4 अगस्त 2021 से प्रभावी माना जाएगा।

कंपनी ने कहा है कि बिड़ला का इस्तीफा मंजूर करने के साथ ही बोर्ड ने हिमांशु कपानिया को कंपनी के मौजूदा गैर कार्यकारी निदेशक को गैर कार्यकारी चेयरमैन चुना है। कपानिया आदित्य बिड़ला समूह द्वारा मनोनीत हैं। उन्हें दूरसंचार क्षेत्र का 25 साल का अनुभव है।
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बिड़ला ने सरकार से की है हिस्सेदारी छोड़ने पेशकश
बता दें, इससे पूर्व कुमार मंगलम बिड़ला कर्ज में डूबी दूरसंचार कंपनी वोडाफोन आइडिया के अस्तित्व को बचाने के लिए वोडाफोन आइडिया में अपनी प्रमोटर हिस्सेदारी छोड़ने की पेशकश कर चुके हैं। बिड़ला ने गत दिनों कैबिनेट सचिव को लिखे पत्र में कहा कि वे किसी भी सरकारी या घरेलू वित्तीय कंपनी को अपनी हिस्सेदारी देने को तैयार हैं। 

मालूम हो कि कुमार मंगलम बिड़ला वोडाफोन इंडिया के प्रमोटर और चेयरमैन हैं। मौजूदा समय में कंपनी का बाजार पूंजीकरण (बाजार हैसियत) करीब 24,000 करोड़ रुपये है।कुमार मंगलम की कंपनी में 27 फीसदी हिस्सेदारी है। वहीं ब्रिटेन की कंपनी वोडाफोन पीएलसी में उनकी 44 फीसदी हिस्सेदारी है। वोडाफोन इंडिया पर करीब 1.80 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है। 

खतरे में वोडाफोन आइडिया को वजूद
बिड़ला ने अपने पत्र में कहा कि अगर सरकार किसी अन्य कंपनी को इसे चलाने में सक्षम समझती है, तो वे उस कंपनी को भी अपनी हिस्सेदारी देने के लिए तैयार हैं। विदेशी निवेशकों में भरोसा जगाने के लिए सरकार को कदम उठाने की जरूरत है क्योंकि अगर सरकार ने जल्द ही जरूरी कदम नहीं उठाए, तो वोडाफोन आइडिया को वजूद खतरे में पड़ सकता है।

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