केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन रवि अग्रवाल ने बुधवार को कहा कि रीयल एस्टेट लेनदेन से इंडेक्सेशन लाभों को हटाना करदाताओं के लिए फायदेमंद साबित होगा। उन्होंने कहा कि इसे सादे गणित के बजाय वास्तविक बाजार की गतिशीलता के आधार पर देखा जाना चाहिए।
सीबीडीटी चेयरमैन ने कहा कि बजट के इस कदम का मकसद इस प्रक्रिया को सरल बनाना है क्योंकि कोई भी जटिल ढांचा अपने साथ विवाद भी लेकर आता है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के प्रमुख ने कहा कि व्यावहारिक रूप से देखते हैं कि वर्तमान में बाजार में क्या होता है।
"अचल संपत्ति का मामला लें, संपत्ति की दरें या लाभ पिछले दस वर्षों में काफी बढ़ गए हैं। अब, पिछले 10 वर्षों में नई व्यवस्था के साथ अपने इंडेक्सेशन की तुलना करें, मान लीजिए कि आपने 2014 में एक संपत्ति खरीदी है, और आप इसे 2024-25 में बेच रहे हैं। तो इंडेक्सेशन का लाभ केवल 1.5 गुना होगा। मान लिए कि यदि संपत्ति एक्स है, तो मूल्यांकन की सूचकांक लागत 1.5 गुना होगी। 10 साल में इसमें केवल 1.5 गुना की वृद्धि होगी।
सीबीडीटी चेयरमैन ने कहा कि हमने (सीबीडीटी और आयकर विभाग) कुछ गणना की है और पाया है कि यदि संपत्ति की दर 10 साल में तीन गुना बढ़ती है तो बजट में घोषित नई कर व्यवस्था फायदेमंद है। अग्रवाल ने कहा, "व्यावहारिक रूप से, ज्यादातर मामलों में, संपत्ति की दरें तीन गुना से अधिक बढ़ गई हैं। उस गणित को छोड़िए जो कहता है कि अगर दस साल में प्रॉपर्टी रेट दो गुना या डेढ़ गुना बढ़ गया है तो क्या होता है वगैरह... वास्तविकता यह है कि संपत्ति की दरें तीन गुना से अधिक हो गई हैं और रियल्टी क्षेत्रों में ... टियर वन और टियर टू शहर... सर्किल रेट बढ़ गए हैं... यहां तक कि बाजार की दरें भी।
सीबीडीटी चेयरमैन ने कहा, "2001 को आधार मानें तो 20-25 वर्षों में संपत्ति की दरें बहुत अधिक बढ़ गई हैं, और अब 2024 में, इन 23 वर्षों में, यदि संपत्ति की दर सात गुना या साढ़े सात गुना बढ़ गई है, तो नई व्यवस्था फायदेमंद है। गणित एक तरफ है, जब आप वास्तविक बाजार में आते हैं, तो आप पाते हैं कि नई कर व्यवस्था बेहतर है। अग्रवाल ने कहा कि प्रभावी रूप से (नई व्यवस्था में) कर की बाध्यता कम है।
सीबीडीटी चेयरमैन रवि अग्रवाल ने कहा, "हम लंबे समय से इस इंडेक्सेशन शासन के साथ रह रहे हैं और हमें इसकी आदत हो गई है। लेकिन, अगर हम वास्तव में इसका विश्लेषण गणित के दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि वास्तविक बाजार की गतिशीलता को देखते हुए करना शुरू करते हैं, तो कोई भी समझ सकता है कि यह योजना बेहतर है।
सीबीडीटी प्रमुख ने कहा कि नई व्यवस्था का मकसद प्रक्रिया को सरल बनाना है, जिसे समझने में आसान (करदाता के लिए) होना चाहिए, क्रियान्वित करने में (कर विभाग के लिए) आसान होना चाहिए और इसमें 'प्रावधानों की बहुलता' से पैदा होने वाले विवादों को कम से कम करने का भी लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने कहा कि पुरानी संपत्तियों के मामले में उचित बाजार मूल्य के 2001 के इंडेक्सेशन के अनुसार पुरानी व्यवस्था लागू रहेगी। बजट में 2001 से पहले खरीदी या विरासत में मिली संपत्तियों पर करदाताओं के लिए इंडेक्सेशन लाभ को बरकरार रखा गया है। हालांकि, एलटीसीजी इंडेक्सेशन प्रस्ताव को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
बजट में एक अक्टूबर से वायदा व विकल्प (एफएंडओ) कारोबार पर लगने वाले प्रतिभूति सौदा कर (एसटीटी) में बढ़ोतरी के औचित्य के बारे में पूछे जाने पर चेयरमैन ने कहा कि यहां लेनदेन में बेतहाशा वृद्धि देखी जा रही है। उन्होंने कहा, 'यह देखा गया कि "हर कोई भाग ले रहा था (एफएंडओ में) ... इसमें अधिक जोखिम शामिल हैं और यह भी तथ्य है कि अगर इतनी भागीदारी है, तो क्या हम वास्तव में उससे कुछ राजस्व प्राप्त कर सकते हैं? यह एक कारण है, दूसरा प्रश्न यह है कि क्या हम इसे बढ़ावा देते हैं? हमने एक प्रवृत्ति देखी है, और हमें कहना चाहिए कि यह ठीक है या हमें एक ऐसी व्यवस्था के साथ आना चाहिए जो (प्रणाली) को सामान्य करे।'
बजट में एसटीटी में वृद्धि का एलान आर्थिक सर्वेक्षण में डेरिवेटिव कारोबार में खुदरा निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी पर चिंता जताए जाने के एक दिन बाद किया गया। आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि विकासशील देश में सट्टा व्यापार का कोई स्थान नहीं है। यह भी कहा गया है कि एफएंडओ कारोबार में खुदरा निवेशक भागीदारी में तेज वृद्धि संभवतः लोगों की जुए के प्रति आकर्षण की प्रवृत्ति से प्रेरित है।