अर्थव्यवस्था ने 2023-24 की पहली छमाही में हासिल की गई वृद्धि की रफ्तार को कायम रखा है। कॉरपोरेट क्षेत्र के पूंजीगत खर्च के नए दौर से आर्थिक वृद्धि के अगले चरण को रफ्तार मिलने की उम्मीद है। आरबीआई ने मंगलवार को ‘अर्थव्यवस्था की स्थिति’ पर जारी बुलेटिन में कहा, उच्च आवृत्ति वाले संकेतक बता रहे हैं कि विभिन्न चुनौतियों के बावजूद घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत गति से बढ़ रही है। हाल के महीनों में यह धारणा मजबूत हुई है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था 2024 में उम्मीद से अधिक मजबूत वृद्धि हासिल करेगी। जोखिमों का भी ज्यादा खतरा नहीं रहेगा।
बुलेटिन में प्रकाशित लेख के मुताबिक, सरकार बुनियादी ढांचा समेत विभिन्न परियोजनाओं पर खर्च बढ़ाने पर जोर दे रही है। निजी क्षेत्र का निवेश भी सुधर रहा है। ऐसे में कॉरपोरेट क्षेत्र के नए दौर के पूंजीगत खर्च से अर्थव्यवस्था को चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में हासिल की गई अपनी रफ्तार बढ़ाने में मदद मिलेगी। केंद्रीय बैंक ने 2024-25 में जीडीपी की वृद्धि दर 7 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है। यह लेख आरबीआई के डिप्टी गवर्नर माइकल देवव्रत पात्रा की टीम ने लिखा है। एजेंसी
मुख्य महंगाई : 52 माह में सबसे कम
बुलेटिन में महंगाई पर कहा गया है कि खाद्य उत्पादों के सस्ता होने से नवंबर-दिसंबर के मुकाबले जनवरी, 2024 में खुदरा महंगाई कम हो गई है। मुख्य महंगाई भी अक्तूबर, 2019 के बाद 52 महीने के अपने सबसे निचले स्तर पर है। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए खुदरा महंगाई के घटकर 4.5 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है।
चालू खाता घाटा : अब घटकर एक फीसदी
बाहरी मोर्चे पर आरबीआई ने बुलेटिन में कहा, देश का चालू खाता घाटा (कैड) वित्त वर्ष 2023-24 की दूसरी तिमाही में घटकर एक फीसदी रह गया, जो 2022-23 की समान अवधि में 3.8 फीसदी रहा था। दुनिया के सॉफ्टवेयर कारोबार में भारत की स्थिति और सर्वाधिक रेमिटेंस पाने के लिहाज से उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष और 2024-25 में चालू खाता घाटा प्रबंधनीय रहेगा। आरबीआई ने कर्ज-जीडीपी अनुपात पर आईएमएफ के तर्क को किया खारिज
इस लेख में देश के सामान्य सरकारी कर्ज के बारे में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के तर्क को खारिज किया गया है। लेख में इस बात पर जोर दिया गया कि कर्ज-जीडीपी अनुपात अनुमान से काफी कम हो सकता है। पात्रा के नेतृत्व वाली टीम ने कहा, सामान्य सरकारी कर्ज-जीडीपी अनुपात 2030-31 तक घटकर 73.4 फीसदी होने का अनुमान है। यह आंकड़ा आईएमएफ के 78.2 फीसदी के अनुमान से करीब पांच फीसदी कम है।