फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

स्मृतिशेष: पीएम और पूर्व पीएम समेत कई राज्यों के सीएम ने स्वामीनाथन के निधन पर जताया शोक, बेटी ने जताया आभार

Thu, 28 Sep 2023 10:23 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

MS Swaminathan: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी.देवेगौड़ा और हरियाणा, दिल्ली सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों एवं कई नेताओं ने प्रख्यात वैज्ञानिक और भारत में हरित क्रांति के जनक एम.एस.स्वामीनाथन के निधन पर गुरुवार को गहरा शोक व्यक्त किया।
विज्ञापन
एमएस स्वामीनाथन - फोटो : Social Media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी.देवेगौड़ा और हरियाणा, दिल्ली सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों एवं कई नेताओं ने प्रख्यात वैज्ञानिक और भारत में हरित क्रांति के जनक एम.एस.स्वामीनाथन के निधन पर गुरुवार को गहरा शोक व्यक्त किया।

विज्ञापन


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक शोक संदेश में 'नवाचार के पावरहाउस' के साथ अपनी बातचीत को याद किया, जिन्होंने 'कई लोगों के लिए पोषण संरक्षक' के रूप में कार्य किया। मोदी ने ट्वीट किया, ''डॉ. एमएस स्वामीनाथन जी के निधन से गहरा दुख हुआ। हमारे देश के इतिहास में एक बहुत ही महत्वपूर्ण समय में, कृषि में उनके अभूतपूर्व काम ने लाखों लोगों के जीवन को बदल दिया और हमारे राष्ट्र के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की।

पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा ने स्वामीनाथन को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि कई मौकों पर उन्हें उनके सुझावों से बहुत लाभ हुआ। आंध्र प्रदेश के राज्यपाल एस.अब्दुल नजीर, राज्य के मुख्यमंत्री वाई एस जगन मोहन रेड्डी, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित कई नेताओं ने भी स्वामीनाथन के निधन पर शोक जताया है।
विज्ञापन


देवेगौड़ा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘मैं डॉ.एम एस स्वामीनाथन के निधन की खबर सुनकर दुखी हूं। कई मौकों पर उनकी सलाह से मुझे बहुत लाभ हुआ और हाल में उनसे संपर्क हुआ था। मेरी संवेदनाएं उनके परिवार एवं मित्रों के साथ है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।’’

भारत में हरित क्रांति के जनक के तौर पर विख्यात 98 वर्षीय स्वामीनाथन का उम्र संबंधी बीमारियों की वजह से गुरुवार को निधन हो गया। स्वामीनाथन की तीन बेटियां हैं जिनमें डॉ. सौम्या स्वामीनाथन इस समय एम एस स्वामीनाथन रिसर्च फांउडेशन की अध्यक्ष हैं और पूर्व में विश्व स्वास्थ्य संगठन की मुख्य वैज्ञानिक भी रह चुकी हैं। उनकी दूसरी बेटी मधुरा स्वामीनाथन बेंगलुरु स्थित भारतीय सांख्यिकी संस्थान में आर्थिक विश्लेषण इकाई की प्रमुख एवं प्रोफेसर हैं जबकि तीसरी बेटी नित्या राव यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट एंजलिया में स्कूल ऑफ इंटरनेशनल डेवलपमेंट में लैंगिकता एवं विकास विभाग की प्रोफेसर हैं। स्वामीनाथन की पत्नी मीना स्वामीनाथन, प्री स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय शिक्षाविद थीं और पिछले साल मार्च में उनका निधन हो गया था।

आंध्र प्रदेश के राज्यपाल नजीर ने कहा कि पद्म विभूषण से सम्मानित स्वामीनाथन प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक, पादप अनुवांशिकी विशेषज्ञ, प्रशासक और मानवतावादी थे जिन्होंने भारत की हरित क्रांति में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ‘‘ स्वामीनाथन विस्तृत रूप से भारत की हरित क्रांति में अपने योगदान के लिए जाने जाते हैं जिसके तहत अधिक उपज वाली गेंहू एवं धान की प्रजातियों की रोपाई शुरू की गई।’’

नजीर ने कहा कि वह हृदय से स्वामीनाथन के परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हैं। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने स्वामीनाथन की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने अपने दृष्टिकोण से ग्रामीण परिवेश को बदल दिया और वह हरित क्रांति के जनक थे। उन्होंने कहा कि स्वामीनाथन की यादें हमेशा बनी रहेंगी।

हरियाणा के मुख्यमंत्री खट्टर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी पोस्ट में कहा, ‘‘भारतीय हरित क्रांति के जनक, पद्मविभूषण से सम्मानित प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक श्री एमएस स्वामीनाथन जी का निधन भारतीय कृषि जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘उच्च उपज देने वाली फसल की किस्मों एवं आधुनिक तकनीकों को विकसित कर कृषि उत्पादन को उन्नत बनाने में उनका अतुलनीय योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति व दुख की घड़ी में शोकाकुल परिवार को संबल प्रदान करे।’’ हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा ने भी स्वामीनाथन के निधन पर शोक व्यक्त किया।

दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने स्वामीनाथन के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘ भारत की हरित क्रांति के जनक और प्रणेता डॉ.एम एस स्वामीनाथन जी के निधन पर मेरी ओर से हार्दिक संवेदनाएं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘कृषि के क्षेत्र में उनके अतुलनीय कार्यों ने भारत को आत्मनिर्भर बनाया और लाखों लोगों को खाद्य असुरक्षा से बचाया, और हमारे देश पर एक अमिट छाप छोड़ी। उनकी विरासत पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।’’

कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन की बेटी सौम्या स्वामीनाथन के अनुसार, एमएस किसानों के कल्याण और समाज के सबसे गरीब लोगों के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन की पूर्व उप महानिदेशक डॉ सौम्या स्वामीनाथन ने कहा, 'पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत ठीक नहीं थी। आज सुबह उनका अंत बहुत शांति से हुआ। अंत तक, वह किसानों के कल्याण और समाज में सबसे गरीब लोगों के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध थे।" स्वामीनाथन की पुत्री ने कहा, "परिवार की ओर से, मैं उन सभी को धन्यवाद देना चाहती हूं जिन्होंने अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं... मुझे उम्मीद है कि हम तीनों बेटियां उस विरासत को जारी रखेंगी जो मेरे पिता और मेरी मां मीना स्वामीनाथन ने हमें दिखाई है।

सौम्या ने आगे कहा कि उनके पिता उन कुछ लोगों में से एक थे जिन्होंने माना कि कृषि में महिलाओं की उपेक्षा की जाती है। सौम्या स्वामीनाथन ने कहा, "उन्होंने महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की हैं। उनके विचारों ने महिला सशक्तिकरण योजना जैसे कार्यक्रमों को जन्म दिया है, जो महिला किसानों का समर्थन करने के लिए है। जब वह छठे योजना आयोग के सदस्य थे, तो पहली बार लिंग और पर्यावरण पर एक अध्याय शामिल किया गया था... ये दो योगदान हैं जिन पर उन्हें बहुत गर्व था।"

कृषि में अपने क्रांतिकारी योगदान से परे, डॉ. स्वामीनाथन नवाचार के पावरहाउस और कई लोगों के लिए एक पोषण संरक्षक थे। अनुसंधान और मेंटरशिप के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता ने अनगिनत वैज्ञानिकों और नवोन्मेषकों पर एक अमिट छाप छोड़ी है। 7 अगस्त, 1925 को तमिलनाडु के कुंभकोणम में जन्मे मनकोम्बु सांबशिवन स्वामीनाथन, जिन्हें प्यार से एमएस स्वामीनाथन के नाम से जाना जाता है, अपने पीछे एक ऐसी विरासत छोड़ गए हैं, जिसने भारतीय कृषि और वैश्विक खाद्य सुरक्षा के परिदृश्य को हमेशा के लिए बदल दिया है।

कृषि और आनुवंशिकी की दुनिया में स्वामीनाथन की आजीवन यात्रा 1943 के बंगाल अकाल के दौरान एक महत्वपूर्ण क्षण से गहराई से प्रभावित थी, जिसमें चावल की भारी कमी के कारण अनगिनत लोगों की जान चली गई थी। इस मानवीय संकट ने युवा स्वामीनाथन को गहराई से प्रेरित किया, कृषि अनुसंधान के लिए उनके जुनून और भूख को समाप्त करने की उनकी प्रतिबद्धता को प्रज्वलित किया। उनकी व्यक्तिगत प्रेरणा ने उन्हें मद्रास कृषि कॉलेज और भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया।
 

वहीं, रेत कलाकार सुदर्शन पटनायक ने भारत की हरित क्रांति के जनक एमएस स्वामीनाथन को अंतिम श्रद्धांजलि देते हुए रेत की मूर्ति बनाई, उनका आज चेन्नई में निधन हो गया।

विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें