इस साल आईपीओ बाजार से निवेशकों को बंपर मुनाफा हुआ है। वर्ष 2021 आईपीओ वर्ष बन सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के एक लेख के अनुसार, घरेलू यूनिकॉर्न उद्यमों के प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के साथ पूंजी बाजार में उतरने से घरेलू शेयर बाजारों में तेजी है। अब निवेशकों को डिजिटल भुगतान और वित्तीय सेवा प्रदाता कंपनी पेटीएम के आईपीओ का इंतजा है। लेकिन आईपीओ की तैयारी कर रही पेटीएम पर संकट का बादल मंडरा रहा है। अचानक कंपनी के एक पूर्व निदेशक खुद को कंपनी का सह-संस्थापक बताते हुए सामने आए हैं। अशोक कुमार सक्सेना ने बाजार नियामक सेबी से कंपनी के आईपीओ पर रोक लगाने की भी मांग की है। सक्सेना ने पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी। दिल्ली की एक अदालत ने पुलिस को इस मामले की जांच पूरी करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है।
क्या है मामला?
कंपनी के सह-संस्थापक होने का दावा करने वाले 71 साल के अशोक कुमार सक्सेना का कहना है कि उन्होंने दो दशक पहले कंपनी में 27,500 डॉलर का निवेश किया था, लेकिन उन्हें कभी भी शेयर नहीं मिले। दिल्ली डिस्ट्रिक्ट कोर्ट जज अनिमेश कुमार ने पुलिस को तीन हफ्तों में फाइनल रिपोर्ट देने को कहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस को जल्दी से जल्दी इस मामले की जांच पूरी करनी चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 13 सितंबर को होगी।
मालूम हो कि पेटीएम ने आईपीओ की मंजूरी के लिए जुलाई में ही सेबी के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) जमा कराया है। किसी भी कंपनी के लिए आईपीओ लाने के लिए डीआरएचपी फाइल करना जरूरी होता है। डीआरएचपी में कंपनी और उसके कारोबार की विस्तृत जानकारी होती है। इस दस्तावेज में कंपनी बताती है कि वह बाजार से पैसा क्यों और कितना जुटाना चाहती है। डीआरएचपी में इस मामले को क्रिमिनल प्रोसीडिंग के कॉलम में बताया गया है। सक्सेना ने कहा है कि इस आईपीओ को रोका जाना चाहिए वरना निवेशकों का इससे नुकसान हो सकता है।