बीते दिनों केंद्र सरकार ने एक योजना- 'राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन' या 'एनएमपी' का एलान किया था, जिसके जरिए सरकार ने बुनियादी ढांचा योजनाओं पर खर्च के लिए पैसे जुटाने का चार साल का रोडमैप बनाया है। वहीं, विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार की इस योजना का विरोध किया है। इस पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज भड़क गईं। वित्त मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार पारदर्शिता और राष्ट्रहित से कोई समझौता नहीं करेगी। विपक्षी दल सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि वह योजना के नाम पर देश की मूल्यवान संपत्तियों को बेचने पर आमादा है।
उन्होंने कहा कि चोरी-छुपे काम करना कांग्रेस की कार्यशैली है। साथ ही उन्होंने कहा कि मोदी सरकार देश की भलाई के लिए काम करती है। सीतारमण ने कहा कि उनकी सरकार दूरदर्शी और जनकल्याणकारी सुधारों को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।
छह लाख करोड़ की सरकारी संपत्तियों के विनिवेश की योजना
बता दें कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 23 अगस्त को नेशनल मॉनेटाइजेशन पाइप लाइन (एनएमपी) का शुभारंभ किया था। इसके जरिए देश की करीब छह लाख करोड़ रुपये की सरकारी संपत्तियों का विनिवेश करने की योजना है। वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा था कि एनएमपी उन ब्राउनफील्ड संपत्तियों के लिए है, जिनमें निवेश पहले से ही किया जा रहा है।
सीतारमण ने कहा था कि यह उन संपत्तियों के लिए है, जहां संपत्ति का पूरी तरह से मुद्रीकरण किया जा चुका है या जिनका कम उपयोग हो रहा है। वित्त मंत्री ने कहा था कि इन संपत्तियों में हम निजी साझेदारी के जरिए इनका बेहतर मुद्रीकरण करेंगे और इसके जरिए जो भी संसाधन हमें प्राप्त होंगे उनका बुनियादी ढांचे के निर्माण में और बेहतर उपयोग किया जा सकेगा।
नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा कि योजना में हर साल 1.5 लाख करोड़ रुपये जुटाए जाएंगे। 2021-22 में मुद्रीकरण के जरिये 88 हजार करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा है। योजना से जुटाई राशि का इस्तेमाल बुनियादी ढांचा क्षेत्र को मजबूत बनाने में होगा, जिससे हर साल लाखों रोजगार भी पैदा किए जा सकेंगे।