S&P Global: सरकार की योजना राजकोषीय घाटे को वित्त वर्ष 2024 के 5.9 फीसदी से घटाकर वित्त वर्ष 26 में 4.5 फीसदी पर लाने की है। एसएंडपी ने अपनी टिप्पणी में कहा कि भारत की वृद्धि दर वित्त वर्ष 25 में फिर से 6.9% तक पहुंच सकती है और वित्त वर्ष 27 तक इसके इस स्तर के आसपास रहने की संभावना है।
एसएंडपी ग्लोबल शोधकर्ताओं ने बुधवार को बताया कि भारत सरकार वित्त वर्ष 2026 तक अपने राजकोषीय घाटे के लक्ष्य के करीब बनी रहेगी। शोधकर्ताओं ने कहा कि मुफ्त खाद्यान्न योजना की घोषणा के विस्तार और अगले साल होने वाले आम चुनावों के कारण इस तरह की और अधिक व्ययों की संभावना के बावजूद अपने राजकोषीय घाटे के लक्ष्य के करीब रहेगी।
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एशिया पैसिफिक क्रेडिट आउटलुक 2024 के लॉन्च पर एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स के एशिया पैसिफिक सॉवरेन रेटिंग्स के निदेशक एंड्रयू वुड ने कहा, "जैसे-जैसे हम चुनाव के करीब जा रहे हैं, अधिक व्यय की पहल संभव है। निकट भविष्य में ये उपभोग के अनुकूल हो सकते हैं, लेकिन मध्यम अवधि के वित्त पर इनका बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है।"
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले हफ्ते महामारी के दौरान शुरू की गई मुफ्त खाद्यान्न योजना को अगले पांच साल के लिए बढ़ाने की घोषणा की है।
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वुड ने कहा, 'सरकार अपने राजकोषीय घाटे के लक्ष्य के काफी करीब रह सकती है। खासकर वित्त वर्ष 26 तक राजकोषीय घाटे के रास्ते पर रहने की संभावना है, ऐसा खाद्य योजना विस्तार के बाद भी संभव है। यह जीडीपी के लगभग 0.7 फीसदी के करीब रह सकती है।
सरकार की योजना राजकोषीय घाटे को वित्त वर्ष 2024 के 5.9 फीसदी से घटाकर वित्त वर्ष 26 में 4.5 फीसदी पर लाने की है। एसएंडपी ने अपनी टिप्पणी में कहा कि भारत की वृद्धि दर वित्त वर्ष 25 में फिर से 6.9% तक पहुंच सकती है और वित्त वर्ष 27 तक इसके इस स्तर के आसपास रहने की संभावना है।
एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स के वरिष्ठ अर्थशास्त्री (एशिया प्रशांत) विश्रुत राणा ने कहा कि अगले साल वृद्धि को मजबूत शहरी सेवा गतिविधि और बेहतर ग्रामीण गतिविधि से समर्थन मिलेगा। रेटिंग एजेंसी ने कहा, "धीरे-धीरे पूंजी की गहराई, अनुकूल जनसांख्यिकी और उत्पादकता में सुधार विकास के आवश्यक कारक हैं। एसएंडपी को उम्मीद है कि रिजर्व बैंक वित्त वर्ष 25 तक दरों में एक प्रतिशत की कमी कर सकता है। एसएंडपी ने कहा कि अगले छह वर्षों के भीतर सेवा अर्थव्यवस्था का हिस्सा बढ़ने और बुनियादी ढांचे में निवेश दोगुना होने की उम्मीद है।