1. किंगफिशर एयरलाइंस
शुरुआत: 2003
कब बंद हुई: 2012
एक समय में भारत के मशहूर कारोबारियों में शुमार विजय माल्या की बर्बादी की कहानी किसी से छिपी नहीं है। साल 2003 में किंगफिशर एयरलाइंस की स्थापना की गई थी। इसका स्वामित्व कई बैंकों से करीब 9,000 करोड़ रुपये का लोन लेकर भागे विजय माल्या की अगुवाई वाले युनाइटेड ब्रिवरीज ग्रुप के पास था। साल 2005 में एयरलाइंस का कमर्शियल ऑपरेशन शुरू हुआ था और कुछ ही समय में यह एविएशन सेक्टर की बड़ी कंपनी बन गई। लेकिन विजय माल्या की किंगफिशर ने अपने कारोबार को 2012 में ही समेट लिया।
तब माल्या ने ट्वीट कर बताया था, 'खराब प्रैट ऐंड व्हिट्नी इंजनों की वजह से किंगफिशर एयरलाइंस ठप हुई है।' उन्होंने मुआवजे के लिए इन इंजनों को तैयार करने वाली कंपनी आईएआई के खिलाफ मुकदमा भी किया था। बंद होने के करीब 10 साल पहले शुरू हुई किंगफिशर लगातार कर्ज में डूब रही थी। 2013 में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के नेतृत्व में भारतीय बैंकों के एक संघ ने ऋण वापसी के लिए संपर्क किया, जिसका भुगतान नहीं किया गया। आज माल्या को बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइन द्वारा बकाया ऋण की अदायगी की मांग के लिए दुनिया भर में फ्रीजिंग आदेश का पालन करना पड़ रहा है।
2. रिलायंस कम्युनिकेशंस (अनिल अंबानी समूह)
शुरुआत: 2004
कब बंद हुई: 2019
जहां मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज नई ऊंचाइयां छू रही है, वहीं उनके छोटे भाई अनिल अंबानी के नेतृत्व वाली कंपनियां बंद होने के कगार पर हैं। अनिल अंबानी रिलायंस कम्युनिकेशंस, रिलायंस नेवल एंड इंजीनियरिंग, रिलायंस, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस कैपिटल के मालिक हैं। आज ये सभी कंपनियां भारी कर्ज के बोझ तले दबी हैं। साल 2008 में अनिल अंबानी दुनिया के छठवें सबसे अमीर शख्स थे, लेकिन बाद में उन्हें रिलायंस कम्युनिकेशंस के निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया। अनिल अंबानी अरबपतियों के क्लब से भी बाहर हो गए हैं। फोर्ब्स इंडिया की 2007 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार अनिल अंबानी की नेटवर्थ 45 अरब डॉलर थी और उस समय वह देश के तीसरे सबसे बड़े रईस थे। आज अनिल अंबानी की नेटवर्थ जीरो है।
अनिल अंबानी पर फरवरी 2020 तक 30.5 करोड़ डॉलर का कर्ज था, जबकि उनकी असेट्स केवल 8.2 करोड़ डॉलर थी। रिलायंस कम्युनिकेशंस और रिलायंस नैवल एंड इंजीनियरिंग सहित ADAG की कई कंपनियां कर्ज का भुगतान करने में नाकाम रहीं, जिसके बाद बैंकों ने उन्हें बैंकरप्सी कोर्ट में घसीट लिया। रिलायंस कम्युनिकेशन ने कहा था कि उस पर भारतीय बैंकों और वित्तीय संस्थानों का 26,000 करोड़ रुपये का कर्ज है। अनिल अंबानी की बड़ी कंपनियों में रिलायंस कैपिटल पर दिसंबर 2020 तक 20,380 करोड़ रुपये और रिलायंस होम फाइनेंस पर 13 हजार करोड़ रुपये का कर्ज था।
3. जेट एयरवेज
शुरुआत: 1993
कब बंद हुई: 2019
1993 में दो विमानों, बोइंग 737 और बोइंग 300 के साथ जेट एयरवेज की लॉन्चिंग हुई थी। 2006 में कंपनी ने करीब 2250 करोड़ रुपये में एयर सहारा को खरीदा था। नवंबर 2013 में एतिहाद एयरलाइस ने जेट के 24 फीसदी शेयर खरीदे थे। तब कंपनी के फाउंडर और चेयरमैन नरेश गोयल के पास 51 फीसदी शेयर थे। चार महीने तक संकट से जूझने के बाद 18 अप्रैल 2019 में जेट एयरवेज की उड़ानें अस्थायी तौर पर बंद हो गई थीं।
जेट एयरवेज के पास दिसंबर 2018 तक 124 विमान थे। जनवरी 2019 से जेट का संकट गहराने लगा था। महज चार महीने में विमानों की संख्या घटकर पांच रह गई थी। गोयल को भी कंपनी से बाहर होना पड़ा। 25 साल पुरानी एयरलाइन कंपनी पर आठ हजार करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज था और बैंकों ने 400 करोड़ रुपये का इमर्जेंसी फंड देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद कंपनी के सामने 'शटरडाउन' के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। हालांकि, जेट एयरवेज अब फिर से उड़ान भरने के लिए तैयार है। हाल ही में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की मुंबई बेंच ने कुछ शर्तों के साथ जेट एयरवेज के लिए कालरॉक कैपिटल और मुरारी लाल जालान के रिजॉल्यूशन प्लान को मंजूरी दे दी थी।