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IT Raid: कोलकाता की कंपनी के ठिकानों पर इनकम टैक्स का छापा, 200 करोड़ की काली कमाई उजागर

Fri, 19 Nov 2021 04:28 PM IST
दीपक चतुर्वेदी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

IT Raid: आयकर विभाग ने सीमेंट निर्माण और रियल एस्टेट में लगे कोलकाता समूह पर छापेमारी के बाद इस 200 करोड़ रुपये की बेहिसाब आय को उजागर किया है। सीबीडीटी ने इस संबंध में एक बयान जारी कर जानकारी साझा की है। 
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विस्तार
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इनकम टैक्स (आयकर विभाग) की कोलकाता की एक कंपनी के ठिकानों पर गुरुवार को छापेमार कार्रवाई की गई। टीम ने इस दौरान 200 करोड़ रुपये की काली कमाई का पता लगाया है। सीबीडीटी ने इस संबंध में एक बयान जारी कर कहा कि आयकर विभाग ने सीमेंट निर्माण और रियल एस्टेट में लगे कोलकाता समूह पर छापेमारी के बाद इस बेहिसाब आय को उजागर किया है।

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24 ठिकानों पर चलाया गया तलाशी अभियान
आयकर विभाग ने सीमेंट और रियल एस्टेट के निर्माण में लगे कोलकाता स्थित एक प्रमुख समूह पर 16 नवंबर को तलाशी और जब्ती अभियान चलाया। इस दौरान ठिकानों से 1.30 करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी बरामद की गई, जबकि 6 बैंक लॉकरों को जब्त कर लिया गया है। अब तक की गई तलाशी कार्रवाई में 200 करोड़ रुपये की बेहिसाब आय का पता चला है। 

24 परिसरों में पहुंची थी आईटी विभाग की टीम
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने शुक्रवार को इस छापेमार कार्रवाई की जानकारी साझा करते हुए कहा कि इनकम टैक्स विभाग की टीम ने 16 नवंबर को कोलकाता, असम, मेघालय और दिल्ली में इस कार्रवाई को अंजाम दिया। इस दौरान 24 परिसरों में चलाए गए तलाशी अभियान में इस बेहिसाब संपत्ति का खुलासा हुआ है। 
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इन दस्तावेजों को किया गया जब्त
सीबीडीटी ने कहा कि जब्त किए गए दस्तावेजों से उत्पादन को दबाने, बेहिसाब और बिक्री के कम चालान, फर्जी पार्टियों का उपयोग करके खरीद की लागत बढ़ाने और नकद में किए गए खर्च में अनियमितता उजागर होती है। सीबीडीटी ने कहा कि इस तरह से कंपनी द्वारा कर योग्य आय की चोरी का संकेत पता चलता है। इसके साथ ही कंपनी द्वारा फ्लैटों की बिक्री में अनियमितता का भी पता चला है। 

छोटे कर्मचारियों के नाम पर चल रही थीं फर्में 
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया है कि समूह की कुछ फर्मों को ऐसे व्यक्तियों/कर्मचारियों के नाम पर चलाया गया जो छोटे पद पर तैनात थे। इन कर्मचारियों को बहुत कम वेतन मिलता था, लेकिन इनकी फर्मों को करोड़ों रुपये का भुगतान किया जा रहा था। ये सभी फर्में समूह के कारखाना परिसर से ही संचालित हो रही थीं। 

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