सरकार की ओर से 14 क्षेत्रों के लिए शुरू की गई उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना से देश में दिसंबर, 2023 तक 1.06 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया है। कुल निवेश में औषधि और सौर मॉड्यूल का योगदान करीब आधा रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल दिसंबर तक सूचना प्रौद्योगिकी, हार्डवेयर, वाहन एवं इसके कलपुर्जे, कपड़ा और एसीसी (उन्नत रसायन सेल) बैटरी भंडारण जैसे क्षेत्रों में कम निवेश आया है। सरकार ने 2021 में 1.97 लाख करोड़ रुपये के खर्च के साथ दूरसंचार, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं, कपड़ा, चिकित्सा उपकरणों के विनिर्माण, वाहन, विशेष स्टील, खाद्य उत्पाद, उच्च दक्षता वाले सौर पीवी मॉड्यूल, उन्नत रसायन बैटरी, ड्रोन और औषधि जैसे 14 क्षेत्रों के लिए पीएलआई योजना की घोषणा की थी।
औषधि क्षेत्र में उम्मीद से अधिक निवेश
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, औषधि क्षेत्र में पिछले साल दिसंबर तक 25,813 करोड़ रुपये का निवेश मिला। यह 17,275 करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद से अधिक है। इस क्षेत्र के प्रमुख लाभार्थियों में डॉ. रेड्डीज लैब, सिप्ला, ग्लेनमार्क फार्मा, बायोकॉन और वॉकहार्ट शामिल हैं।
सौर पीवी मॉड्यूल क्षेत्र को मिले 22,904 करोड़ रुपये
उच्च दक्षता वाले सौर पीवी मॉड्यूल में निवेश 22,904 करोड़ रुपये रहा। इस क्षेत्र से 1.10 लाख करोड़ के निवेश की उम्मीद थी। इसके लाभार्थियों में शिरडी साई इलेक्ट्रिकल्स, रिलायंस न्यू एनर्जी सोलर, अदाणी इंफ्रास्ट्रक्चर और टाटा पावर सोलर शामिल हैं।
आईटी हार्डवेयर क्षेत्र को मिला सबसे कम लाभ
पिछले साल दिसंबर तक जिन अन्य क्षेत्रों में अच्छा निवेश प्राप्त हुआ, उनमें थोक दवाएं, चिकित्सा उपकरण, खाद्य प्रसंस्करण और दूरसंचार शामिल हैं। सबसे कम निवेश आईटी हार्डवेयर में 270 करोड़ रहा। इस क्षेत्र में 2,517 करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद थी। कम निवेश पाने वाले अन्य क्षेत्रों में वाहन और वाहन कल पुर्जे (67,690 करोड़ के अनुमान के मुकाबले 13,037 करोड़ रुपये) और कपड़ा (19,798 करोड़ के अनुमान के मुकाबले 3,317 करोड़ रुपये) शामिल है। एसीसी बैटरी स्टोरेज क्षेत्र में 3,236 करोड़ रुपये का निवेश मिला है। यह 13,810 करोड़ के अपेक्षित निवेश के मुकाबले काफी कम है।