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सर्वे : कारोबारी गतिविधियों में सुधार और मांग में बढ़ोतरी से सेवा क्षेत्र की रफ्तार 10.5 साल में हुई सबसे तेज

Thu, 04 Nov 2021 03:23 AM IST
Kuldeep Singh बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आईएचएस मार्किट के बुधवार को जारी सर्वे में कहा गया है कि सेवा क्षेत्र के उत्पादन में यह लगातार तीसरे महीने बढ़ोतरी है। अक्तूबर में कंपनियों के नए कारोबार में बढ़ोतरी की वजह से उत्पादन पिछले एक दशक में सबसे तेज गति से बढ़ा है। इससे रोजगार के अवसर पैदा हुए।
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विस्तार
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कारोबारी गतिविधियों में सुधार और मांग में बढ़ोतरी से सेवा क्षेत्र की गतिविधियों की रफ्तार अक्तूबर में पिछले 10.5 साल में सबसे तेज रही। इस दौरान आईएचएस मार्किट इंडिया का सर्विस बिजनेस एक्टिविटी सूचकांक बढ़कर 58.4 पर पहुंच गया। इस दौरान नौकरियों में भी इजाफा देखने को मिला है। सितंबर में सेवा क्षेत्र का परचेजिंग मैनेजर्स सूचकांक (पीएमआई) 55.2 रहा था। 

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आईएचएस मार्किट के बुधवार को जारी सर्वे में कहा गया है कि सेवा क्षेत्र के उत्पादन में यह लगातार तीसरे महीने बढ़ोतरी है। अक्तूबर में कंपनियों के नए कारोबार में बढ़ोतरी की वजह से उत्पादन पिछले एक दशक में सबसे तेज गति से बढ़ा है। इससे रोजगार के अवसर पैदा हुए। हालांकि, महंगाई की चिंताओं के बीच कारोबारी भरोसा अब भी कमजोर बना हुआ है। पीएमआई का 50 से ज्यादा रहना विस्तार और इससे नीचे का आंकड़ा संकुचन दिखाता है।

इस बीच, अक्तूबर में देश में निजी क्षेत्र का उत्पादन भी तेजी से बढ़ा है। इससे सेवा और विनिर्माण क्षेत्र का सामूहिक उत्पादन (पीएमआई) सूचकांक बढ़कर 58.7 पहुंच गया, जो जनवरी, 2012 के बाद सबसे तेज विस्तार है। सितंबर में सामूहिक उत्पादन सूचकांक 55.3 रहा था। 
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फरवरी के बाद सबसे ज्यादा नौकरियां
आईएचएस मार्किट की सहायक निदेशक (अर्थशास्त्र) पॉलियाना डि लीमा ने कहा कि भारत के सेवा क्षेत्र में लगातार तीसरे महीने सुधार देखने को मिला। कंपनियों की गतिविधियां 10.5 साल में सबसे तेजी से बढ़ने की वजह से नई नौकरियों की रफ्तार सितंबर के मुकाबले बढ़ी है और यह फरवरी, 2020 के बाद सबसे मजबूत स्थिति में पहुंच गई है। इस दौरान सेवा क्षेत्र की कंपनियों ने अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति की है। हालांकि, नियुक्तियों की रफ्तार बहुत तेज नहीं है। 

महंगाई ने बढ़ाई चिंता, लागत में तेज वृद्धि
लीमा ने कहा कि कीमतों के मोर्चे पर चिंता बनी हुई है और उत्पादन लागत दोबारा तेजी से बढ़ रही है। ईंधन की ऊंची कीमत, कच्चे माल, खुदरा, कर्मचारियों और परिवहन की ज्यादा लागत का हवाला देते हुए कंपनियों ने पिछले साढ़े चार साल में सबसे तेज रफ्तार से अपना शुल्क बढ़ाया है। सेवा क्षेत्र की कंपनियों का मानना है कि महंगाई के दबाव से आगामी वर्ष में वृद्धि प्रभावित हो सकती है। 

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