आरबीआई बुलेटिन के अनुसार अप्रैल-मई 2024 के दौरान सकल आवक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) 15.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जो एक साल पहले दर्ज 12.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक था। सकल एफडीआई प्रवाह का 80 प्रतिशत से अधिक विनिर्माण, वित्तीय सेवाओं, कंप्यूटर सेवाओं, व्यापार सेवाओं, और बिजली और अन्य ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में केंद्रित था।
रिजर्व बैंक की ओर से गुरुवार को जारी जुलाई बुलेटिन में कहा गया है कि 2024-25 की दूसरी तिमाही की शुरुआत अर्थव्यवस्था में तेजी के संकेतों के साथ हुई है, हालांकि खाद्य बास्केट में महंगाई अब भी चिंता का विषय बनी हुई है।
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मासिक बुलेटिन में अर्थव्यवस्था की स्थिति पर एक लेख में यह भी कहा गया है कि कृषि परिदृश्य में सुधार और ग्रामीण खर्च में सुधार मांग के लिहाज से महत्वपूर्ण बिंदु साबित हुए हैं। उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति जून 2024 में लगातार तीन महीनों तक नरम पड़ने के बाद स्थिर हुई हैं क्योंकि सब्जियों की कीमतों में व्यापक वृद्धि ने महंगाई में आ रही कमी पर ब्रेक लगा दिया।
आरबीआई के डिप्टी गवर्नर माइकल देवव्रत पात्रा की अगुवाई वाली टीम की और से लिखे गए लेख में कहा गया है, 'यह तर्क कि खाद्य कीमतों के झटके क्षणभंगुर हैं, पिछले एक साल के वास्तविक अनुभव को देखते हुए सही प्रतीत नहीं होते हैं। यह इतना लंबा समय है कि इसे क्षणभंगुर नहीं कहा जा सकता।'
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रिजर्व बैंक ने हालांकि कहा कि बुलेटिन के आलेख में व्यक्त विचार लेखकों के हैं और भारतीय रिजर्व बैंक के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करते।
आरबीआई बुलेटिन के अनुसार अप्रैल-मई 2024 के दौरान सकल आवक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) 15.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जो एक साल पहले दर्ज 12.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक था। सकल एफडीआई प्रवाह का 80 प्रतिशत से अधिक विनिर्माण, वित्तीय सेवाओं, कंप्यूटर सेवाओं, व्यापार सेवाओं, और बिजली और अन्य ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में केंद्रित था।
एफडीआई के प्रमुख स्रोत देशों में मॉरीशस, सिंगापुर, नीदरलैंड, अमेरिका और साइप्रस शामिल हैं, जो 80 प्रतिशत से अधिक प्रवाह के लिए जिम्मेदार हैं। इसके अलावा, अनिवासी जमा (Non Resident Deposits) अप्रैल-मई 2024 में 2.7 बिलियन अमरीकी डालर रहा। एक साल पहले यह 0.6 बिलियन अमरीकी डाॅलर था।