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LIC IPO: निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकार की बड़ी योजना, 30 फीसदी तक घटा सकती है एलआईसी की वैल्यूएशन

Wed, 13 Apr 2022 12:17 PM IST
दीपक चतुर्वेदी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

रिपोर्ट के अनुसार देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी की वैल्यूएशन करीब 30 फीसदी तक घटाई जा सकती है। निवेशकों के बीच एलआईसी के आईपीओ का आकर्षण बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार ऐसा करने जा रही है। सरकार अब एलआईसी की वैल्यूएशन करीब 11 लाख करोड़ रुपये करना चाहती है। 
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एलआईसी
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विस्तार
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काफी समय से देश के सबसे बड़े एलआईसी के आईपीओ का इंतजान निवेशक कर रहे हैं। हालांकि, रूस और यूक्रेन के बीच बीते 48 दिनों से जारी जंग के कारण मार्च में इसे लॉन्च नहीं किया जा सकता, क्योंकि युद्ध शुरू होने के बाद से भारत समेत दुनियाभर के बाजारों में भारी उथल-पुथल का माहौल रहा। अब एक बार फिर इसे पेश करने की तैयारियों शुरू हो गई हैं। सरकार जल्द ही नए सिरे से दस्तावेज जमा करने वाली है। इस बीच खबर आ रही है कि सरकार आईपीओ को और आकर्षित बनाने के लिए इसकी वैल्यूएशन कम कर सकती है।   

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30 फीसदी कम हो सकती है वैल्यू
इस संबंध में जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार भारतीय जीवन बीमा निगम कंपनी की वैल्यूएशन घटाने जा रही है। देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी की वैल्यूएशन करीब 30 फीसदी तक घटाई जा सकती है। निवेशकों के बीच एलआईसी के आईपीओ का आकर्षण बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार ऐसा करने जा रही है। सरकार अब एलआईसी की वैल्यूएशन करीब 11 लाख करोड़ रुपये करना चाहती है। बता दें कि पहले उसने कंपनी की वैल्यूएशन 16 लाख करोड़ रुपये निर्धारित करने की योजना बनाई थी। 

देश का सबसे बड़ा आईपीओ होगा
इस बीच आपको बता दें कि भले ही सरकार कंपनी की वैल्यूएशन घटा दे, उसके बाद भी यह देश का सबसे बड़ा आईपीओ होगा। रिपोर्ट में कहा गया कि सरकार एलआईसी के आईपीओ को कामयाब बनाने के लिए हर हथकंडा अपना रही है। इसके अनुसार सरकार के वैल्यूएशन घटाने से यह निवेशकों के लिए इश्यू और आकर्षक हो जाएगा। इससे आईपीओ में पैसा लगाने वाले निवेशकों के लिए लिस्टिंग गेंस की संभावना भी बड़ेगी। पूर्व में बाजार नियामक के पास भेजे गए दस्तावेजों के मुताबिक सरकार ने देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी में अपनी पांच फीसदी हिस्सेदारी बेचने का निर्णय किया है।
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अप्रैल अंत तक लॉन्च की उम्मीद
एलआईसी के इस आईपीओ के लॉन्च को लेकर चर्चाओं का जो दौर फिर से शुरू हुआ है, उसके मुताबिक, देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी के आईपीओ के लिए अधिकारियों ने मंत्रियों के एक शीर्ष समूह को अप्रैल के मध्य या अंत की तारीखों का सुझाव दिया है। अधिकारियों की ओर से जिस मंत्रियों के समूह को यह सुझाव दिया गया है, उसमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, सड़क व परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल शामिल हैं। रिपोर्ट में इस बात की संभावना जताई गई है कि जल्द ही मंत्रियों का यह समूह एलआईसी आईपीओ को लेकर फैसला ले सकता है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि डिपार्टमेंट ऑफ इनवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (दीपम) और सरकार की तरफ से नियुक्त अधिकारियों ने शेयर बाजार पर पैनी निगाह रखते हुए स्थिति का आकलन किया है और इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि एलआईसी का आईपीओ लॉन्च करने के लिए यह उपयुक्त समय है। 

10 फीसदी हिस्सा पॉलिसीधारकों के लिए
गौरतलब है कि सरकार देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी में अपनी पांच फीसदी हिस्सेदारी बेचना चाहती है। एलआईसी दस्तावेजों के अनुसार, एलआई के आईपीओ का एक हिस्सा एंकर निवेशकों के लिए आरक्षित होगा। इसके अलावा एलआईसी आईपीओ इश्यू साइज का 10 फीसदी तक पॉलिसीधारकों के लिए और पांच फीसदी कर्मचारियों के लिए आरक्षित हो सकता है। एलआईसी में सरकार के पास 100 फीसदी हिस्सेदारी यानी 632.49 करोड़ शेयर हैं। कंपनी के शेयरों की फेस वैल्यू 10 रुपये है। बता दें कि एलआईसी का ये आईपीओ देश के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ होगा। 

पूरी तरह ऑफर फॉर सेल आईपीओ
एलआईसी का ये आईपीओ अब तक सबसे बड़ा आईपीओ होगा। सेबी में सौंपे गए डीआरएपी के अनुसार, एलआईसी का इश्यू पूरी तरह ऑफर फॉर सेल होगा। इसमें सरकार अपनी 5 फीसदी हिस्सेदारी के अंतर्गत 31.6 करोड़ शेयर जारी करेगी। रिपोर्ट के मुताबिक, इस हिसाब से कंपनी की एम्बेडेड वैल्यू 5.4 लाख करोड़ रुपये होगी। अमूमन किसी बीमा कंपनी का मार्केट कैप इस वैल्यू का चार गुना होता है। इस हिसाब से देखें तो एलआईसी की मार्केट वैल्यू 288 अरब डॉलर यानी करीब 22 लाख करोड़ रुपये होगी और एलआईसी देश की सबसे बड़ी मूल्यवान कंपनी बन जाएगी। 

20 फीसदी एफडीआई को मंजूरी
गौरतलब है कि बीते दिनों हुई कैबिनेट की बैठक में एलआईसी आईपीओ को लेकर एक बड़ा फैसला लिया गया था। दरअसल, आईपीओ-बाउंड एलआईसी में एफडीआई की अनुमति दे दी गई थी। बैठक में एलआईसी में ऑटोमेटिक रूट से 20 प्रतिशत तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की मंजूरी पर मुहर लगाई गई थी। इस फैसले के बाद एलआई के प्रस्तावित आईपीओ में विदेशी निवेश का रास्ता खुल गया है। 

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